
भोपाल। देश में चुनावी माहौल की हलचल के बीच मध्यप्रदेश से आई यह खबर चुनाव व्यवस्था की अंदरूनी तस्वीर खोलकर रख देती है। मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण कार्य (SIR) की सुस्त रफ्तार पर केंद्रीय चुनाव आयोग बुधवार को फट पड़ा। वर्चुअल समीक्षा बैठक में 19 जिलों के कलेक्टर जुड़े, और जैसे ही असल वजहें सामने आईं — अफसरों के माथे पर पसीना और आयोग की सख्ती दोनों साफ दिखाई दीं।
मीटिंग में खुली बड़ी लापरवाही
बैठक में आयोग की डायरेक्टर शुभ्रा सक्सेना और सचिव बिनोद कुमार मौजूद रहे। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव झा भी मीटिंग में शामिल हुए। लेकिन जब आयोग के सदस्यों ने धीमी प्रगति की वजह पूछी — तब बड़ा खुलासा ग्वालियर से हुआ। ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान ने साफ कहा, “हमारे यहां एन्यूमरेशन फॉर्म 10 दिन देर से 14 नवंबर को मिले, जबकि फॉर्म वितरण की प्रक्रिया चार नवंबर से प्रदेश में शुरू हो चुकी थी।” इस बयान ने सीधे-सीधे मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय की लापरवाही उजागर कर दी। और जब इस देरी पर प्रतिक्रिया के लिए संजीव झा से पूछा गया — उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और पल्ला झाड़ लिया।
डिजिटलाइजेशन और जमीनी स्तर पर सख्त निर्देश
चुनाव आयोग की डायरेक्टर शुभ्रा सक्सेना ने आदेश जारी किए —
✔ डिजिटलाइजेशन जल्द से जल्द पूरा कराया जाए
✔ बीएलओ की सहायता के लिए वॉलंटियर नियुक्त हों
✔ भोपाल, इंदौर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में स्पेशल कैम्प लगाकर गणना पत्रक भरवाए जाएं
तीन बड़े जिलों पर गिरी गाज — कार्रवाई की सीधी चेतावनी
सबसे धीमी प्रगति भोपाल, इंदौर और शहडोल में सामने आई। आयोग ने कलेक्टर और एसडीएम से बेहद नाराजगी जताते हुए कहा, काम में तेजी नहीं आई तो इनके खिलाफ लिखित कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी। इतना ही नहीं कलेक्टर और एसडीएम के जवाब से असंतुष्ट आयोग के सदस्यों ने भोपाल, इंदौर और ग्वालियर के सबसे कमजोर विधानसभा क्षेत्रों के ERO से सीधे बात की।
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