
भोपाल। मकर संक्रांति की सुबह नर्मदापुरम का सेठानी घाट आस्था और श्रद्धा से सराबोर नजर आया। ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें घाट पर लग गईं। दूर-दराज के शहरों से लोग मां नर्मदा का आशीर्वाद लेने यहां पहुंचे। जैसे ही सूरज की पहली किरणें नर्मदा मैया की लहरों पर पड़ीं, घाट “हर हर नर्मदे” के जयघोष से गूंज उठा।
स्नान के बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना
पवित्र डुबकी लगाने के बाद श्रद्धालुओं ने घाट पर ही पूजा-पाठ किया। किसी ने सूर्यदेव को अर्घ्य दिया तो कोई मां नर्मदा के चरणों में सिर झुकाकर सुख-समृद्धि की कामना करता नजर आया। सेठानी घाट पर पैर रखने तक की जगह नहीं बची थी। हर तरफ भक्ति का माहौल और चेहरे पर आस्था की चमक साफ दिखाई दे रही थी।
बच्चों ने संभाली स्वच्छता की जिम्मेदारी
इस बार मकर संक्रांति पर नर्मदापुरम में सिर्फ श्रद्धा ही नहीं, बल्कि स्वच्छता का संदेश भी देखने को मिला। घाट पर छोटे-छोटे बच्चे सफाई करते हुए नजर आए। मामा-भांजा की जोड़ी सुबह से घाट पर पड़ी फूल-मालाएं, नारियल और अन्य पूजा सामग्री नदी से निकालती दिखी। एक बच्चे ने मुस्कराते हुए कहा, “नर्मदा जी में कचरा नहीं होना चाहिए, यह हमारी मां हैं।” यह नजारा देखकर वहां मौजूद लोग भी बच्चों की तारीफ करते नहीं थक रहे थे।
भोपाल से महिलाओं का जत्था, भजनों से गूंजा घाट
भोपाल से आई महिलाओं का एक समूह सुबह-सुबह नर्मदा मैया में स्नान करने नर्मदापुरम पहुंचा। स्नान के बाद महिलाओं ने पीतल के लोटे में नर्मदा जल भरा और फिर मंदिरों की ओर रवाना हो गईं। महिलाओं ने भजन भी गाए, जिससे घाट का माहौल और भक्तिमय हो गया। अनमोल तिवारी से बातचीत में महिलाओं ने कहा कि “नर्मदा जी शंकर जी की बेटी हैं, इसलिए उनका जल जीवन को पवित्र बना देता है।”
शंकर जी की पुत्री हैं नर्मदा मैया
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नर्मदा नदी को भगवान शंकर की पुत्री माना जाता है। कहा जाता है कि ऋक्ष पर्वत यानी अमरकंटक में तपस्या करते समय शिवजी के पसीने की बूंदों से नर्मदा का जन्म हुआ था, इसलिए उन्हें ‘शंकरी’ भी कहा जाता है। इसी मान्यता के चलते नर्मदा में स्नान को मोक्षदायी माना जाता है।
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