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Madhaya Pradesh

पद्मश्री लेखक आलोक मेहता ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को भेंट की ‘मोदी राज के 25 वर्ष’ पर आधारित पुस्तक

20 जन, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
Cm Dr Mohan Yadav and Alok Mehta

Cm Dr Mohan Yadav and Alok Mehta

Hitesh Kumar Singh
डेस्क रिपोर्टर
Hitesh Kumar Singh

भोपाल। पद्मश्री लेखक आलोक मेहता ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को 'मोदी राज के 25 वर्ष’ पर आधारित पुस्तक ‘रिवॉल्यूशनरी राज- नरेंद्र मोदी: 25 इयर्स’ भेंट की। कॉफी टेबल बुक प्राप्त करने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार प्रधानमंत्री मोदी के विकास मॉडल को अपनाते हुए आर्थिक प्रगति को नई गति देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य में बड़े पैमाने पर देशी-विदेशी निवेश को आकर्षित कर औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन, स्टार्ट-अप्स, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाएं प्रभावी रूप से क्रियान्वित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुस्तक में उल्लिखित समाज कल्याण, महिला सशक्तिकरण, युवाओं में अनुशासन तथा आत्मनिर्भर विकसित भारत के प्रधानमंत्री के सपनों को साकार करने के लिए वे पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने पुस्तक की विस्तृत भूमिका केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से लिखे जाने को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया।

 

यह भेंट-वार्ता दिल्ली से दावोस (स्विट्ज़रलैंड) में आयोजित विश्व आर्थिक मंच की बैठक में भाग लेने से पूर्व हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री की नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश अग्रणी भूमिका निभा रहा है। प्रदेश में पुस्तकों और पठन-संस्कृति को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से गीता भवन निर्माण योजना में पुस्तकालयों का प्रावधान भी किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार पत्रकारों, साहित्यकारों और सांस्कृतिक कलाकारों को सामाजिक जागरूकता के लिए हर संभव सहयोग, सहायता व प्रोत्साहन देती रहेगी।

 

शिक्षण संस्थानों व पुस्तकालयों तक पहुंचाया जाना चाहिए पुस्तक को 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केंद्रीय मंत्री अमित शाह, प्रधानमंत्री के संकल्पों को क्रियान्वित करते हुए आतंकवाद और नक्सल समस्या से प्रभावी ढंग से निपट रहे हैं। जिससे देश विकास के पथ पर निरंतर आगे बढ़ रहा है। ऐसे विचारों को जन-जन तक पहुंचाने में यह पुस्तक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। पुस्तक शिक्षण संस्थानों व पुस्तकालयों तक पहुंचाया जाना चाहिए।

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