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Paracetamol Syrup MP: बच्चों की दवा फेल, जबलपुर में बैच पर रोक, क्या खतरे में मरीजों की सेहत?

24 अप्रैल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
Paracetamol Syrup MP: बच्चों की दवा फेल, जबलपुर में बैच पर रोक, क्या खतरे में मरीजों की सेहत?
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

Paracetamol Syrup MP मामले ने मध्यप्रदेश में दवा सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जबलपुर में जांच के दौरान पैरासिटामोल सिरप का एक बैच फेल पाया गया, जिसके बाद तुरंत रोक लगा दी गई। लेकिन सवाल यह है—क्या यह दवा पहले ही मरीजों तक पहुंच चुकी है?


जांच में फेल हुआ बैच, तुरंत रोक के आदेश

रिपोर्ट के अनुसार सरकारी अस्पतालों में सप्लाई किया गया बैच नंबर 41507 गुणवत्ता जांच में फेल हो गया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने इस बैच के उपयोग पर पूरी तरह रोक लगा दी है। यह कदम तुरंत उठाया गया, लेकिन इससे पहले दवा कितनी इस्तेमाल हुई—यह अब भी साफ नहीं है, जो चिंता बढ़ाता है।


CMHO का एक्शन, स्टॉक अलग रखने के निर्देश

मामले की जानकारी मिलते ही जिला CMHO ने सभी अस्पतालों को निर्देश जारी किए। अधिकारियों से कहा गया है कि इस बैच की दवा का उपयोग तुरंत बंद करें और उपलब्ध स्टॉक को अलग सुरक्षित रखें। साथ ही जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है—लेकिन कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं।


पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

यह पहली बार नहीं है जब एमपी में दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं। इससे पहले भी कई जगहों पर पैरासिटामोल समेत अन्य सिरप और दवाएं गुणवत्ता जांच में फेल पाई गई हैं। बार-बार सामने आ रहे ये मामले संकेत देते हैं कि सिस्टम में कहीं न कहीं बड़ी खामी है—जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।


सप्लाई से पहले जांच पर सवाल, सिस्टम पर उठे बड़े प्रश्न

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब दवाएं अस्पताल पहुंचने से पहले जांच प्रक्रिया से गुजरती हैं, तो फिर फेल सैंपल बाजार तक कैसे पहुंचते हैं? क्या जांच सिर्फ कागजों तक सीमित है या सप्लाई चेन में कहीं चूक हो रही है? यह मामला पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर रहा है—और जवाब की मांग कर रहा है।


बच्चों के लिए खतरा क्यों ज्यादा?

पैरासिटामोल सिरप बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा दी जाने वाली दवा है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसी लापरवाही सीधे तौर पर मरीजों की जान से खिलवाड़ है। खासकर बच्चों के लिए यह जोखिम और भी गंभीर हो सकता है—जो इस मामले को और संवेदनशील बना देता है।


पुरानी घटनाओं की याद, बढ़ी चिंता

प्रदेश में पहले भी दवाओं को लेकर गंभीर घटनाएं सामने आ चुकी हैं। छिंदवाड़ा में जहरीले कफ सिरप से बच्चों की मौत और किडनी फेल होने के मामले अब भी लोगों के जेहन में ताजा हैं। ऐसे में यह नया मामला एक बार फिर सिस्टम की जिम्मेदारी और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।

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