
भोपाल। एम्स भोपाल आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को अब अस्पताल की जटिल गलियों में भटकना नहीं पड़ेगा। संस्थान जल्द ही मोबाइल ऐप और क्यूआर कोड आधारित स्मार्ट मार्गदर्शन प्रणाली शुरू करने जा रहा है, जो मरीजों को सीधे डॉक्टर के केबिन, विभाग या वार्ड तक पहुंचने का रास्ता दिखाएगी।
स्मार्ट टेक्नोलॉजी से आसान होगा अस्पताल का सफर
बड़े अस्पतालों में सही विभाग ढूंढना अक्सर मरीजों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। इसी समस्या को हल करने के लिए एम्स भोपाल ने आइआइटी इंदौर की ‘दृष्टि’ टीम के साथ मिलकर डिजिटल मार्गदर्शन प्रणाली विकसित करने की पहल की है। इस सिस्टम का मकसद अस्पताल परिसर की जटिलता को तकनीक के जरिए आसान बनाना है, ताकि मरीजों को समय और ऊर्जा दोनों की बचत हो।
QR कोड स्कैन करते ही खुल जाएगा इंटरैक्टिव नक्शा
सिस्टम का पहला चरण वेब बेस्ड होगा। अस्पताल के प्रमुख प्रवेश द्वारों और महत्वपूर्ण जगहों पर QR कोड लगाए जाएंगे।
QR कोड स्कैन करते ही मोबाइल पर इंटरैक्टिव मैप खुलेगा
यह नक्शा मरीज को चरण-दर-चरण सही दिशा दिखाएगा
विभाग, वार्ड या पर्चा काउंटर तक पहुंचना आसान होगा
इससे नए आने वाले मरीजों को अस्पताल की ‘भूलभुलैया’ जैसी संरचना से राहत मिलेगी।
मोबाइल ऐप से मिलेगा सटीक दिशा-निर्देशन
दूसरे चरण में मोबाइल ऐप आधारित नेविगेशन शुरू किया जाएगा। भवनों के बीच रास्ता दिखाने के लिए GPS तकनीक का इस्तेमाल होगा। इमारतों के अंदर, जहां GPS कमजोर रहता है, वहां हर 15 मीटर पर रिले डिवाइस लगाए जाएंगे। इससे दिशा बताने की सटीकता काफी बढ़ जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार यह सिस्टम बड़े अस्पतालों के लिए भविष्य की जरूरत माना जा रहा है।
पहले पायलट प्रोजेक्ट, फिर पूरे परिसर में विस्तार
अस्पताल प्रशासन के मुताबिक इस तकनीक को पहले पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जाएगा। अप्रैल के अंत तक इसकी शुरुआत होने की संभावना है। अगर पायलट सफल रहता है, तो इसे पूरे परिसर में लागू किया जाएगा, जिससे रोजाना आने वाले हजारों मरीजों को फायदा मिलेगा।
बुजुर्गों और दिव्यांग मरीजों को मिलेगी सबसे ज्यादा राहत
अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि यह सिस्टम खासकर बुजुर्गों, दिव्यांगों और गंभीर मरीजों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा। बड़े अस्पतालों में जाने को लेकर जो मानसिक झिझक या डर रहता है, वह भी कम होगा।
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

