
भोपाल। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की जेब पर फिर बड़ा असर डाला है। तेल कंपनियों ने 9 दिन में तीसरी बार ईंधन के दाम बढ़ा दिए हैं। शनिवार को पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा कर दिया गया। इस नई बढ़ोतरी के बाद मध्य प्रदेश के कई शहरों में पेट्रोल की कीमतें ₹113 प्रति लीटर के करीब पहुंच गई हैं। लगातार बढ़ रहे दामों ने अब ट्रांसपोर्ट से लेकर रोजमर्रा के खर्च तक चिंता बढ़ा दी है।
मई में तीसरी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम
मई महीने में यह तीसरी बढ़ोतरी है। इससे पहले 15 मई को पेट्रोल-डीजल करीब ₹3 प्रति लीटर महंगे किए गए थे। इसके बाद 19 मई को फिर करीब 90 पैसे की बढ़ोतरी हुई। अब ताजा संशोधन के बाद मई में कुल मिलाकर ईंधन की कीमतें करीब ₹5 प्रति लीटर तक बढ़ चुकी हैं। लगातार बढ़ते रेट्स ने वाहन चालकों की परेशानी और बढ़ा दी है।
MP के कई शहरों में पेट्रोल ₹113 के करीब
मध्य प्रदेश पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन के अनुसार, कई जिलों में पेट्रोल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गई हैं।
खंडवा और सिवनी: ₹112.96 प्रति लीटर
आगर मालवा: ₹112.96
छिंदवाड़ा: ₹112.91
धार: ₹112.89
मंदसौर: ₹112.84
कटनी: ₹112.81
बैतूल: ₹112.70
राजगढ़: ₹112.59
टीकमगढ़: ₹112.54
वहीं डीजल की कीमतें भी कई शहरों में ₹98 प्रति लीटर के आसपास पहुंच चुकी हैं। रेट्स में स्थानीय टैक्स के कारण हल्का अंतर संभव बताया गया है।
आखिर क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
रिपोर्ट्स के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी इसकी सबसे बड़ी वजह है। कुछ समय पहले तक क्रूड ऑयल करीब 70 डॉलर प्रति बैरल था, जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक सप्लाई को लेकर चिंता के कारण तेल बाजार दबाव में है। इसका सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ रहा है।
तेल कंपनियों पर बढ़ा दबाव
भारत अपनी जरूरत का करीब 90% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ते ही सरकारी तेल कंपनियों की लागत भी बढ़ जाती है। कंपनियों का कहना है कि लंबे समय तक ऊंचे दाम बने रहने पर घाटे की भरपाई करना मुश्किल हो जाता है। इसी वजह से चरणबद्ध तरीके से पेट्रोल-डीजल महंगा किया जा रहा है।
बेस प्राइस से कई गुना कैसे बढ़ जाता है रेट?
कच्चे तेल से पेट्रोल-डीजल बनने और ग्राहक तक पहुंचने के बीच कई तरह के टैक्स और चार्ज जुड़ते हैं। यही वजह है कि अंतिम कीमत बेस प्राइस से कई गुना ज्यादा हो जाती है।
ऐसे तय होती है अंतिम कीमत
1. कच्चे तेल की कीमत
अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदे गए क्रूड ऑयल की कीमत सबसे पहला आधार होती है।
2. रिफाइनिंग और कंपनी चार्ज
रिफाइनरी में प्रोसेसिंग के बाद कंपनियां अपना खर्च और मार्जिन जोड़ती हैं।
3. केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी
इसके बाद केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी और रोड सेस लगाती है।
4. डीलर कमीशन
पेट्रोल पंप संचालकों का तय कमीशन भी कीमत में शामिल होता है।
5. राज्य सरकार का VAT
अंत में राज्य सरकारें अलग-अलग वैट लगाती हैं। यही कारण है कि भोपाल, इंदौर, जबलपुर और दूसरे शहरों में रेट अलग दिखाई देते हैं।
आगे और बढ़ सकते हैं दाम?
विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहीं, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल और महंगा हो सकता है। ऐसे में आम लोगों की नजर अब सरकार और तेल कंपनियों के अगले फैसले पर टिकी हुई है।
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