
रिपोर्ट : अतुल जैन
पिछोर बस स्टैंड पर मंगलवार को हुई ‘पिछोर बचाओ जन आक्रोश सभा’ में अवैध शराब, जुआ-सट्टा, राशन कालाबाजारी और कथित रिश्वतखोरी को लेकर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी सामने आई। सभा के बाद प्रदर्शनकारियों ने एसडीएम के नाम तहसीलदार शिवशंकर गुर्जर को 11 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा।
सामाजिक न्याय एकता मंच के आयोजन में नेताओं ने स्थानीय समस्याओं पर कार्रवाई की मांग रखी। अरविंद लोधी ने अवैध शराब की बिक्री रोकने के लिए प्रशासन को 15 दिन का समय दिया, जबकि वक्ताओं ने आंदोलन आगे बढ़ाने की चेतावनी भी दी।
मंच पर मौजूद रहे कई प्रमुख चेहरे
कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित पटैरिया ने की। महेंद्र सिंह लोधी मुख्य अतिथि रहे। सभा में अरविंद सिंह लोधी, जिला पंचायत सदस्य मनीराम लोधी, बृजमोहन लोधी मुखिया और महेश डोंगर समेत कई प्रमुख लोग मंच पर मौजूद रहे।
आयोजन और प्रचार से जुड़े कई नेता सत्तारूढ़ दल की राजनीति से जुड़े बताए गए हैं। इसी वजह से सभा को केवल विपक्षी प्रदर्शन के रूप में देखना उचित नहीं माना गया और इसे सत्तारूढ़ राजनीतिक खेमे के भीतर की नाराजगी से भी जोड़कर देखा गया।
महेंद्र सिंह लोधी ने उठाए स्थानीय मुद्दे
महेंद्र सिंह लोधी ने अपने संबोधन में महारानी अवन्तीबाई के संघर्ष का संदर्भ दिया। उन्होंने कहा कि उनके वंशज अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले रहे हैं और पिछोर में मौजूदा समस्याओं को अब स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने गांव-गांव अवैध शराब बिकने, जुआ-सट्टा संचालित होने और गरीबों के राशन की कालाबाजारी के आरोप लगाए।
महोली मामले का भी उठा मुद्दा
जिला पंचायत सदस्य मनीराम लोधी ने ग्राम महोली में सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ हुई कथित मारपीट का मामला सभा में उठाया।
उन्होंने कहा कि महारानी अवन्तीबाई की प्रतिमा के सम्मान को लेकर सभी वर्गों के लोग एकत्र हुए थे। उनके अनुसार संघर्ष के बाद प्रशासन को प्रतिमा दोबारा स्थापित करनी पड़ी।
मनीराम लोधी ने अन्याय के मामलों में प्रभावित लोगों के साथ खड़े रहने का भरोसा भी दिलाया।
प्रशासन को 15 दिन में कार्रवाई की मांग
सभा अध्यक्ष अमित पटैरिया ने क्षेत्र में अवैध शराब, जुआ और सट्टे के कारोबार पर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने व्यवस्था में सुधार नहीं होने पर आंदोलन को आगे बढ़ाने की चेतावनी दी।
अरविंद लोधी ने भी गांवों में अवैध शराब की बिक्री का मुद्दा उठाते हुए कार्रवाई के लिए प्रशासन के सामने 15 दिन की समय-सीमा रखी।
ज्ञापन में अपराध और भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दे
आंदोलनकारियों की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में कई स्थानीय समस्याओं को शामिल किया गया। इसमें अवैध शराब से परिवारों पर पड़ रहे असर और युवाओं में बढ़ती नशे की समस्या का मुद्दा प्रमुख रहा।
ज्ञापन में इन मामलों पर कार्रवाई की मांग की गई:
- अवैध शराब और नशे के खिलाफ कार्रवाई
- जुआ और सट्टे पर रोक
- चोरी एवं लूट की बढ़ती घटनाओं पर नियंत्रण
- सरकारी विभागों में कथित रिश्वतखोरी की जांच और कार्रवाई
- राशन दुकानों में कालाबाजारी पर रोक
- बाहरी असामाजिक तत्वों की गतिविधियों पर कठोर कार्रवाई
सोशल मीडिया और महोली मामले को लेकर भी मांग
ज्ञापन में सोशल मीडिया के जरिए जातिगत वैमनस्य फैलाने वालों पर अंकुश लगाने की मांग की गई। महोली में सामाजिक कार्यकर्ताओं से मारपीट के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की बात भी रखी गई।
इसके अलावा सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने और गौशालाओं की व्यवस्था बेहतर तरीके से संचालित करने की मांग की गई।
किसानों की समस्याएं भी ज्ञापन में शामिल
किसानों को आवारा पशुओं और नीलगायों से होने वाले नुकसान का मुद्दा भी उठाया गया। आंदोलनकारियों ने मूंगफली को भावांतर योजना में शामिल करने की मांग रखी।
नामांतरण, सीमांकन और अभिलेख दुरुस्ती से जुड़े लंबे समय से लंबित मामलों के निपटारे के लिए गांव-गांव शिविर लगाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।
आंदोलन के राजनीतिक मायने पर भी चर्चा
सभा में सत्तारूढ़ दल की राजनीति से जुड़े प्रभावशाली चेहरों की मौजूदगी को पिछोर की स्थानीय राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा गया। इन नेताओं की सार्वजनिक सक्रियता को क्षेत्रीय नेतृत्व के प्रति असंतोष से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
क्षेत्रीय विधायक प्रीतम सिंह लोधी का नाम इस राजनीतिक संदर्भ में सामने आया। सभा में उठे मुद्दों और मंच पर मौजूद नेताओं की भूमिका ने स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
यदि 15 दिन में प्रशासन की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो आंदोलन का अगला चरण बड़े प्रदर्शन या शक्ति प्रदर्शन का रूप ले सकता है। इसका असर आगामी चुनावी समीकरणों पर पड़ने की संभावना भी राजनीतिक स्तर पर चर्चा का विषय बनी है।
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