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विकास, सुशासन, जनकल्याण और राष्ट्रहित को केंद्र में रखकर पीएम नरेंद्र मोदी ने तय की ढाई दशक की सार्वजनिक जीवन की यात्रा: डॉ. मोहन यादव

17 सित, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
विकास, सुशासन, जनकल्याण और राष्ट्रहित को केंद्र में रखकर पीएम नरेंद्र मोदी ने तय की ढाई दशक की सार्वजनिक जीवन की यात्रा: डॉ. मोहन यादव
Hitesh Kumar Singh
डेस्क रिपोर्टर
Hitesh Kumar Singh

राजनीति के लंबे इतिहास में ऐसे अनेक नेता हुए हैं, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। कुछ अपनी प्रशासनिक क्षमता के लिए पहचाने गए, तो कुछ ने राजनीतिक कौशल से अलग पहचान बनाई। ऐसे नेता विरले ही होते हैं, जो संगठन से निकलकर मुख्यमंत्री के रूप में प्रशासनिक कार्यकुशलता की मिसाल कायम करें और आगे चलकर प्रधानमंत्री के रूप में देश की राजनीति और शासन-व्यवस्था को नई दिशा देने के साथ वैश्विक मंच पर भारत की प्रतिष्ठा और प्रभाव को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाएं।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सार्वजनिक जीवन ऐसी ही लंबी यात्रा का उदाहरण है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में लगभग 13 वर्षों की जिम्मेदारी से लेकर वर्ष 2014 में देश के प्रधानमंत्री बनने तक उनकी यात्रा में विकास, सुशासन, जनभागीदारी और राष्ट्रहित प्रमुख विषय रहे हैं। प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने आत्मनिर्भर, सुरक्षित, समृद्ध और प्रभावशाली भारत के निर्माण को अपनी प्राथमिकताओं में रखा।


वैश्विक मंच पर भारत की मजबूत आवाज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने वैश्विक मंचों पर अपनी रणनीतिक स्वायत्तता और राष्ट्रीय हितों को प्रमुखता दी है। अमेरिका और रूस जैसी प्रमुख शक्तियों के साथ संबंधों में संतुलन, पश्चिम एशिया में भारतीय हितों की रक्षा और रूस-यूक्रेन संघर्ष जैसे अंतरराष्ट्रीय विषयों पर संवाद एवं शांति का समर्थन भारत की विदेश नीति के महत्वपूर्ण पक्ष रहे हैं। भारत आज वैश्विक राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूती से रखने और विभिन्न शक्ति-केंद्रों के बीच संवाद को बढ़ावा देने में भारत की सक्रियता बढ़ी है। बहुपक्षीय मंचों पर भारत की भूमिका ने देश की बढ़ती वैश्विक उपस्थिति को रेखांकित किया है।


संकट में मानवता का संदेश

कोरोना महामारी के कठिन दौर में भारत ने अपने नागरिकों की सुरक्षा और आवश्यकताओं पर ध्यान देने के साथ अनेक देशों को दवाइयों, वैक्सीन और अन्य आवश्यक सामग्री की सहायता भी उपलब्ध कराई। युद्ध और संकटग्रस्त क्षेत्रों से भारतीय नागरिकों को सुरक्षित स्वदेश लाने के लिए भी विभिन्न अभियान चलाए गए। यूक्रेन में फंसे भारतीय विद्यार्थियों की वापसी सहित कई अवसरों पर भारत ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। कठिन परिस्थितियों में अन्य देशों के नागरिकों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण भी भारत की विदेश नीति और संस्कृति की विशेषता के रूप में सामने आया।


आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट नीति

राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में आतंकवाद के खिलाफ कठोर नीति पर जोर दिया गया। उरी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक और पुलवामा हमले के बाद बालाकोट एयर स्ट्राइक ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति में आए बदलाव को सामने रखा। ऑपरेशन सिंदूर ने भी आतंकवाद के खिलाफ भारत के संकल्प को रेखांकित किया। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक समर्थन जुटाने की दिशा में भारत लगातार सक्रिय रहा है।


गरीब और वंचित वर्गों तक पहुंचा जनकल्याण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीति में गरीब और वंचित वर्गों के जीवन में बदलाव लाने को महत्वपूर्ण स्थान मिला है। प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना, उज्ज्वला योजना और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों तक सरकारी सहायता पहुंची है। पक्का घर, शौचालय, बिजली, गैस कनेक्शन, बैंक खाता, खाद्यान्न और स्वास्थ्य सुरक्षा जैसी मूलभूत आवश्यकताओं को जनकल्याण की योजनाओं से जोड़ा गया। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ को शासन के मूल मंत्र के रूप में आगे बढ़ाया गया।


स्वच्छता को बनाया जनआंदोलन

प्रधानमंत्री के रूप में दायित्व संभालने के बाद नरेंद्र मोदी ने स्वच्छता को राष्ट्रीय अभियान का स्वरूप दिया। स्वयं हाथ में झाड़ू लेकर उन्होंने देशवासियों से स्वच्छ भारत के निर्माण में भागीदारी का आह्वान किया। स्वच्छ भारत अभियान ने गांवों और शहरों में स्वच्छता को लेकर जनभागीदारी बढ़ाने में भूमिका निभाई। मध्यप्रदेश का इंदौर लगातार स्वच्छता के क्षेत्र में अग्रणी शहरों में शामिल रहा है, जो जनभागीदारी का एक उल्लेखनीय उदाहरण है।


अर्थव्यवस्था से लेकर अंतरिक्ष तक बढ़ी भारत की क्षमता

मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत, डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया जैसे अभियानों के माध्यम से उत्पादन, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में नई संभावनाओं पर जोर दिया गया। रक्षा उत्पादन और निर्यात में भारत की क्षमता भी बढ़ी है। अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में चंद्रयान-3 की सफलता भारत की वैज्ञानिक क्षमता की महत्वपूर्ण उपलब्धि रही। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट सफल सॉफ्ट लैंडिंग ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को वैश्विक स्तर पर चर्चा में ला दिया।


युवा शक्ति और महिला सशक्तीकरण पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की युवा आबादी को देश की बड़ी ताकत के रूप में रेखांकित किया है। कौशल विकास, मुद्रा योजना, स्टार्टअप और स्वरोजगार से जुड़े प्रयासों के माध्यम से युवाओं को रोजगार पाने के साथ रोजगार देने की दिशा में भी प्रोत्साहित किया गया। महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और ‘लखपति दीदी’ जैसे कार्यक्रमों पर जोर दिया गया। महिला आरक्षण कानून को राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा गया है।


विकास के साथ विरासत का सम्मान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आधुनिक विकास के साथ भारत की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को जोड़ने पर भी जोर दिया। योग को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने के प्रयासों के परिणामस्वरूप संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता दी। अयोध्या में श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा और जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को समाप्त करने जैसे निर्णय भी उनके राजनीतिक कार्यकाल के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों में शामिल हैं।


‘मन की बात’ से सीधा संवाद

‘मन की बात’ कार्यक्रम के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सामान्य नागरिकों से सीधे संवाद की एक अलग परंपरा विकसित की। गांवों, छोटे शहरों और सामान्य परिवारों से जुड़े अनेक लोगों के कार्यों और उपलब्धियों को इस मंच के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। यह दृष्टिकोण इस विचार को सामने रखता है कि देश का विकास केवल सरकार के प्रयासों से नहीं, बल्कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से संभव है।


सेवा, संघर्ष और राष्ट्र निर्माण की यात्रा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष केवल सत्ता में रहने की अवधि के रूप में नहीं, बल्कि सेवा, संघर्ष, परिश्रम और राष्ट्र निर्माण की निरंतर यात्रा के रूप में देखे जा सकते हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के माध्यम से समाज और राष्ट्र सेवा के संकल्प से शुरू हुई यह यात्रा गुजरात के मुख्यमंत्री से होते हुए देश के प्रधानमंत्री तक पहुंची। उनके सार्वजनिक जीवन में राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने की बात लगातार सामने आती रही है। आत्मनिर्भर, सुरक्षित, समृद्ध और विकसित भारत के लक्ष्य के साथ देश की विकास यात्रा को आगे बढ़ाने का संकल्प उनके राजनीतिक जीवन का प्रमुख पक्ष रहा है।


विकसित भारत के संकल्प में हमारी भूमिका


कहा गया है- “परिश्रम में जो तपा है, उसने ही तो इतिहास रचा है। जिसने फौलादी चट्टानों को तोड़ा है, उसने ही समय को मोड़ा है। समय को मोड़ देने का भी यही समय है, सही समय है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर यह समय राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका पर विचार करने का भी है। हम सभी अपने सामर्थ्य के अनुसार देश के विकास में योगदान देने और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में सहभागी बनने का संकल्प लें।


दीप जलाकर पीएम के दीर्घायु जीवन की कामना करें

प्रधानमंत्री के जन्मदिवस 17 सितंबर के अवसर पर घरों और प्रतिष्ठानों में एक दीप जलाकर उनके दीर्घायु एवं यशस्वी जीवन की कामना करें। यह दीप भारत की निरंतर प्रगति, आत्मनिर्भरता और सशक्त राष्ट्र के संकल्प का प्रतीक बने। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ की भावना के साथ विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की यात्रा निरंतर आगे बढ़े-यही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर हमारी शुभकामना है। “जिसने जीवन संवारा, उसको नमन हमारा।”


. लेखक, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। 

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