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शराब सिंडिकेट की मनमानी पर लगाम की तैयारी, दुकानों पर ई-आबकारी पोर्टल से जनरेटेड क्यूआर कोड लगाना अनिवार्य

28 अप्रैल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
शराब सिंडिकेट की मनमानी पर लगाम की तैयारी, दुकानों पर ई-आबकारी पोर्टल से जनरेटेड क्यूआर कोड लगाना अनिवार्य
Hitesh Kumar Singh
डेस्क रिपोर्टर
Hitesh Kumar Singh

भोपाल। प्रदेश की शराब दुकानों पर हो रही मनमानी वसूली और नियमों के उल्लंघन को रोकने के लिए अब तकनीक और सख्ती करने का निर्णय लिया है। आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने अब हर मदिरा दुकान पर 'क्यूआर कोड' चस्पा करना अनिवार्य कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था उपभोक्ताओं को सशक्त बनाएगी, जिससे वे मौके पर ही अपने स्मार्टफोन से स्कैन कर ब्रांड की वास्तविक और कानूनी दरों का सत्यापन कर सकेंगे।


विभाग के संज्ञान में आया है कि कई जिलों में शराब की दुकानों पर न केवल अधिकतम विक्रय मूल्य एमआरपी से अधिक दाम वसूले जा रहे हैं, बल्कि प्रतिस्पर्धा के चलते न्यूनतम विक्रय मूल्य एमएसपी से कम पर भी शराब बेची जा रही है। इस गंभीर अनियमितता को विभागीय निर्देशों की खुली अवहेलना मानकर अब हर मदिरा दुकान पर ई-आबकारी पोर्टल द्वारा जनरेटेड क्यूआर कोड लगाना अनिवार्य किया गया। इसे स्कैन करते ही उपभोक्ता के मोबाइल पर संबंधित जिले की रेट लिस्ट खुल जाएगी। 


कोई दुकान संचालक यदि निर्धारित एमएसपी से कम या एमआरपी से ज्यादा पर बिक्री करता है, तो उसके विरुद्ध लाइसेंस निरस्तीकरण जैसी कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। उपभोक्ता अब सीधे मौके पर ही रेट का मिलान कर सकेंगे।


जिला अधिकारियों को विशेष क्यूआर कोड उपलब्ध कराए गए

ई-आबकारी पोर्टल के माध्यम से जिला अधिकारियों को विशेष क्यूआर कोड उपलब्ध कराए गए हैं, जिन्हें दुकानों के प्रमुख हिस्सों पर लगाना होगा। कोई लाइसेंसी यदि इन नियमों की अनदेखी करता है या निर्धारित दरों से अलग बिक्री करता पाया जाता है, तो उसे भारी दंड का सामना करना पड़ेगा। मदिरा उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर उत्पाद उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इसमें किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी पारदर्शिता को जमीन पर उतारने के लिए प्रदेश भर में 28 अप्रैल 2026 से 7 मई 2026 तक एक विशेष 10 दिवसीय जांच अभियान चलाया जा रहा है, जिसकी रिपोर्ट 11 मई तक अनिवार्य रूप से तलब की गई है।


क्यूआर कोड के संबंध में दिए गए ये निर्देश


. क्यूआर कोड को ए-3 आकार के स्टिकर पेपर पर प्रिंट कराया जाये।


. पेपर न्यूनतम 250 जीएसएम की गुणवत्ता का होना चाहिए।


. स्टिकर में ग्लू पर्याप्त गुणवत्ता/मात्रा का होना चाहिए, जिससे इसे एक बार चस्पा होने पर निकाला न जा सके।


. प्रत्येक मदिरा दुकान के लिए 5 क्यूआर कोड प्रिंट कराए जाएं। 3 क्यूआर कोड को अभी मदिरा दुकान के ऐसे स्थानों पर चस्पा कराए जाएं जहां से अधिकतम उपभोक्ताओं की ओर से इन्हें आसानी से स्कैन किया जा सके। बाकी 2 क्यूआर कोड को भविष्य में आवश्यकता के लिए सुरक्षित रखा जाए, जिन्हें पूर्व में चस्पा क्यूआर कोड फटने व क्षतिग्रस्त होने पर फिर से चस्पा कराया जाए।


. क्यूआर कोड विभाग द्वारा प्रिंट कराये जाकर मदिरा दुकानों पर चस्पा कराये जाएं , जिसका स्टेशनरी के लिए निर्धारित कोषालय शीर्ष से भुगतान किया जाए।


. सम्बंधित वृत्त प्रभारी की ओर से मदिरा दुकान के क्यूआर कोड को स्कैन किया जाकर यह परिक्षण कर लिया जाए कि इसके माध्यम से मदिरा के विक्रय मूल्य (एमएसपी एवं एमआरपी) की जानकारी प्रदर्शित हो रही है।


. क्यूआर कोड चस्पा होने पर, सम्बंधित वृत प्रभारी से मदिरा दुकान की फोटो प्राप्त की जाए जिसमे क्यूआर कोड प्रदर्शित हों। समस्त दुकानों पर उक्त कार्यवाही होने पर कार्यपूर्णता प्रमाण पत्र इस कार्यालय को भेजा जाए।

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