
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय कॉन्क्लेव “कंट्रीब्यूशन ऑफ सेंट्रली फंडेड इंस्टीट्यूशंस फॉर समृद्ध मध्यप्रदेश@2047” का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। कॉन्क्लेव में केंद्रीय संस्थानों के प्रमुखों के साथ मुख्यमंत्री ने संवाद किया और मध्यप्रदेश के समग्र एवं संतुलित विकास में इन संस्थानों की भूमिका पर चर्चा की।
इस दौरान केंद्रीय संस्थानों के प्रमुखों ने विशेषज्ञता, तकनीकी सहयोग, शोध और नवाचारों के प्रभावी उपयोग को लेकर प्रस्तुतियां दीं। मुख्यमंत्री ने “समृद्ध मध्यप्रदेश@2047” स्मारिका का विमोचन भी किया। इस अवसर पर नारियल एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर मुख्यमंत्री का सम्मान किया गया।
नदियों को जोड़कर जल प्रबंधन बेहतर करने पर जोर
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना मध्यप्रदेश की पहली ऐतिहासिक नदी जोड़ो परियोजना है। इसके माध्यम से नदियों को जोड़कर जल का बेहतर प्रबंधन होगा, सिंचाई का क्षेत्र बढ़ेगा और किसानों को पर्याप्त जल उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा कि परियोजना बाढ़ जैसी आपदाओं के प्रभाव को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उन्होंने पार्वती-कालीसिंध-चंबल (PKC) परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच लंबे समय से चले आ रहे जल-विवाद का समाधान हुआ है। परियोजना से राजस्थान के 15 और मध्यप्रदेश के 15 जिलों में पर्याप्त जल उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का समय स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का है। जब राज्य आगे बढ़ेगा, तभी देश भी आगे बढ़ेगा।
कौशल, शोध और नवाचार को बनाया जाए संस्थानों का केंद्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में “स्किल नई करेंसी और इनोवेशन नई इकोनॉमी” है। ऐसे में संस्थानों को कौशल, शोध, नवाचार एवं उद्यमिता का केंद्र बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने केंद्रीय संस्थानों से मध्यप्रदेश के विकास में अपनी विशेषज्ञता और तकनीकी क्षमता का प्रभावी उपयोग करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन दर्शन में राष्ट्रसेवा और अंत्योदय की भावना थी। अटल बिहारी वाजपेयी संस्थान उनके कार्यों और विचारों को आत्मसात करते हुए आगे बढ़ें, यही उनकी कामना है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केंद्रीय संस्थानों, राज्य सरकार और समाज के समन्वित प्रयासों से मध्यप्रदेश को 2047 तक विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध राज्य बनाने की दिशा में मजबूत आधार तैयार किया जा सकता है।
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