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लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह बोले- नवाचार तभी सार्थक है, जब वह प्रयोगशाला से निकलकर वास्तविक निर्माण स्थल तक पहुंचे

19 अग, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह बोले- नवाचार तभी सार्थक है, जब वह प्रयोगशाला से निकलकर वास्तविक निर्माण स्थल तक पहुंचे
Hitesh Kumar Singh
डेस्क रिपोर्टर
Hitesh Kumar Singh

भोपाल। ‘नवाचार तभी सार्थक है, जब वह प्रयोगशाला से निकलकर वास्तविक निर्माण स्थल तक पहुंचे और मैदानी स्तर पर प्रमाणित परिणाम दे। नवीन तकनीकों को पहले पायलट परियोजनाओं व परीक्षण खंडों में परखा जाए। सफल परिणाम मिलने के बाद उन्हें व्यापक स्तर पर अपनाया जाए।’ 


ये बातें लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने बुधवार को सीएसआईआर-केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली की प्लेटिनम जुबली पर सीएसआईआर-एएमपीआरआई, भोपाल में आयोजित कार्यशाला में कहीं। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान केवल दस्तावेजों तक सीमित न रहे, बल्कि उसका सीधा लाभ अधोसंरचना परियोजनाओं और आमजन तक पहुंचे। कार्यशाला का विषय “सतत अधोसंरचना के लिए नवोन्मेषी सामग्री एवं उन्नत कंपोजिट” था। 


मंत्री राकेश सिंह ने सड़क एवं परिवहन अधोसंरचना के क्षेत्र में 75 वर्षों की उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सीएसआईआर-सीआरआरआई को दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश के अधोसंरचना क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन आया है। प्रधानमंत्री का विजन है कि अधोसंरचना का विकास तेज गति से हो, लेकिन निर्माण टिकाऊ, गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और दीर्घकालिक भी हो। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश भी नवीन तकनीकों एवं नवाचारों को अपनाते हुए तेजी से आगे बढ़ रहा है।


नई तकनीकें गुणवत्तापूर्ण होने के साथ व्यावहारिक और किफायती भी होनी चाहिए

मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि बढ़ते यातायात, भारी वाहनों, सीमित प्राकृतिक संसाधनों और बदलती जलवायु के बीच हमारा लक्ष्य केवल अधिक सड़कें बनाना नहीं, बल्कि सुरक्षित, टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल अधोसंरचना विकसित करना होना चाहिए। इसके लिए वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को स्थानीय संसाधनों पर आधारित कम लागत वाली स्वदेशी तकनीकें विकसित करनी होंगी। नई तकनीकें गुणवत्तापूर्ण होने के साथ व्यावहारिक और किफायती भी होनी चाहिए। पराली सहित अनुपयोगी सामग्रियों का अधोसंरचना निर्माण में उपयोग कर पर्यावरणीय समस्याओं को उपयोगी संसाधनों में बदला जा सकता है।


नागरिक सड़क पर गड्ढे या क्षति का जियो-टैग्ड फोटो ऐप पर कर सकते हैं अपलोड

मंत्री ने लोकपथ ऐप-2 की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नागरिक सड़क पर गड्ढे अथवा क्षति का जियो-टैग्ड फोटो ऐप पर अपलोड कर सकते हैं। शिकायत के निराकरण की समय-सीमा सात दिन से घटाकर चार दिन कर दी गई है। ऐप वैकल्पिक मार्ग, दूरी, टोल टैक्स, अस्पताल और अन्य सुविधाओं की जानकारी देने के साथ ब्लैक स्पॉट से लगभग 500 मीटर पहले वाहन चालक को सतर्क भी करता है।


नवीन तकनीकों को वैज्ञानिक परीक्षण और पायलट प्रयोग में सफल होने के बाद अपनाया जाएगा

एमपीआरडीसी के प्रबंध संचालक भरत यादव ने बताया कि लोक निर्माण विभाग एवं एमपीआरडीसी द्वारा लगभग 50 हजार करोड़ रुपये के सड़क कार्य किए जा रहे हैं। नवीन तकनीकों को वैज्ञानिक परीक्षण और पायलट प्रयोग में सफल होने के बाद अपनाया जाएगा। वैज्ञानिकों के अनुसंधान और अभियंताओं के मैदानी अनुभव से टिकाऊ, सुरक्षित एवं किफायती सड़कें विकसित की जाएंगी।


सीएसआईआर की 37 प्रयोगशालाएं समन्वय के साथ जनोपयोगी तकनीकें कर रही हैं विकसित

सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी ने ऑनलाइन संबोधित करते हुए कहा कि सीएसआईआर की 37 प्रयोगशालाएं समन्वय के साथ जनोपयोगी तकनीकें विकसित कर रही हैं। सीएसआईआर-सीआरआरआई और सीएसआईआर-एएमपीआरआई द्वारा विकसित स्टील स्लैग, फ्लाई ऐश तथा अपशिष्ट आधारित सतत सड़क तकनीकें मध्यप्रदेश की अधोसंरचना के लिए उपयोगी सिद्ध होंगी।


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