
भोपाल। सोचिए, टिकट कन्फर्म हो, सीट नंबर मिल चुका हो—लेकिन ट्रेन में आपका कोच ही न हो। यही हुआ चार यात्रियों के साथ, और अब इस लापरवाही पर रेलवे को मुआवजा देना पड़ेगा।
नागपुर से भोपाल के सफर में हुई बड़ी चूक
यह मामला 30 नवंबर 2024 का है, जब चार वरिष्ठ नागरिक नागपुर से भोपाल की यात्रा कर रहे थे। उन्होंने अमृतसर एक्सप्रेस में DL-1 कोच की सीटें बुक की थीं। लेकिन स्टेशन पहुंचने पर पता चला कि ट्रेन में वह कोच लगा ही नहीं था—यहीं से परेशानी शुरू हुई।
मजबूरी में टॉयलेट के पास बैठकर किया सफर
कोच नहीं मिलने पर यात्रियों को जनरल डिब्बे में बैठना पड़ा। बताया गया कि उन्होंने पूरा सफर टॉयलेट के पास बैठकर किया। रेलवे स्टाफ ने भी मदद करने के बजाय कहा—“जाना है तो जनरल में बैठो”—जिससे मामला और गंभीर हो गया।
आयोग पहुंचा मामला, रेलवे नहीं दे सका जवाब
पीड़ित मंगलेश कुमार जोशी ने मामला उपभोक्ता आयोग में पहुंचाया। रेलवे ने दावा किया कि कोच लगाया गया था, लेकिन वह कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका। कोच पोजिशन डिस्प्ले में DL-1 दिख रहा था, लेकिन असल में वहां दूसरा कोच था—जो लापरवाही को उजागर करता है।
उपभोक्ता आयोग ने रेलवे को ठहराया दोषी
भोपाल उपभोक्ता आयोग ने इसे साफ तौर पर “सेवा में कमी” माना। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि टिकट में कोच की स्पष्ट जानकारी नहीं थी और रेलवे अपने दावे को साबित नहीं कर पाया—जिसके बाद फैसला यात्रियों के पक्ष में गया।
यात्रियों को मिलेगा मुआवजा
आयोग ने रेलवे को यात्रियों को मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह फैसला उन लाखों यात्रियों के लिए भी अहम संदेश है, जो ऐसी समस्याओं का सामना करते हैं—कि अब उनकी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा।
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