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राजा हिरदेशाह सिलेबस में शामिल होंगे: CM मोहन यादव का बड़ा ऐलान, नर्मदा किनारे बनेगा तीर्थ स्थल

28 अप्रैल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
राजा हिरदेशाह सिलेबस में शामिल होंगे: CM मोहन यादव का बड़ा ऐलान, नर्मदा किनारे बनेगा तीर्थ स्थल
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्यप्रदेश में इतिहास को नए तरीके से जीवंत करने की तैयारी शुरू हो गई है। अब छात्र सिर्फ किताबों में ही नहीं, बल्कि तीर्थ स्थल पर जाकर भी राजा हिरदेशाह की जीवन यात्रा को समझ सकेंगे।


सिलेबस में शामिल होंगे राजा हिरदेशाह

डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में ऐलान किया कि राजा हिरदेशाह लोधी के जीवन और संघर्ष को स्कूल पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा। सरकार उनके जीवन के महत्वपूर्ण घटनाक्रम पर शोध कराएगी और उसे व्यवस्थित रूप से पढ़ाया जाएगा। यानी आने वाली पीढ़ियां अब इतिहास को सिर्फ पढ़ेंगी नहीं, बल्कि गहराई से समझेंगी भी।


नर्मदा किनारे बनेगा तीर्थ स्थल

सरकार ने यह भी घोषणा की कि नर्मदा तट स्थित हीरापुर में राजा हिरदेशाह के नाम से एक भव्य तीर्थ स्थल बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य केवल पर्यटन नहीं, बल्कि उनके संघर्ष और बलिदान को जन-जन तक पहुंचाना है। यह पहल इतिहास को अनुभव करने का एक नया माध्यम बन सकती है।


1842 से शुरू हुआ था संघर्ष

राजा हिरदेशाह को “नर्मदा टाइगर” के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने 1842 में अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष का संकल्प लिया और 1858 तक लगातार लड़ाई जारी रखी। बताया गया कि उन्होंने बुंदेलखंड क्षेत्र में बुंदेला और आदिवासी समाज को एकजुट कर आंदोलन खड़ा किया। इतिहास के ये पन्ने अब फिर से मुख्यधारा में लाने की तैयारी है।


संस्कृति और विरासत पर फोकस

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार सांस्कृतिक पुनरोत्थान के लिए लगातार काम कर रही है।

- सागर में रानी अवंतीबाई के नाम पर विश्वविद्यालय

- सम्राट विक्रमादित्य पर शोध संस्थान

- हर नगरीय निकाय में गीता भवन

- हर जनपद में वृंदावन ग्राम


यह योजनाएं इसी दिशा का हिस्सा हैं।


नेताओं ने भी बताया ऐतिहासिक योगदान

कार्यक्रम में शामिल नेताओं ने भी राजा हिरदेशाह के योगदान को अहम बताया। बताया गया कि उन्होंने 1842 से 1858 तक अंग्रेजों के खिलाफ लगातार संघर्ष किया और स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। यह भी उल्लेख किया गया कि उनके साथ उनके करीब 12 भाइयों ने भी बलिदान दिया, जो इस आंदोलन की गंभीरता को दर्शाता है।

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