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सोनम रघुवंशी के सामने सुप्रीम कोर्ट ने रखे दो रास्ते, जानिए अदालत ने क्यों कही आत्मसमर्पण की बात

21 जुल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
सोनम रघुवंशी के सामने सुप्रीम कोर्ट ने रखे दो रास्ते, जानिए अदालत ने क्यों कही आत्मसमर्पण की बात
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

इंदौर। राजा रघुवंशी हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को अदालत ने दो संभावित विकल्पों से अवगत कराया। मामला उसकी जमानत को लेकर मेघालय सरकार की चुनौती से जुड़ा है और अब 23 जुलाई को इसकी अगली सुनवाई होगी।


सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि या तो जमानत पर उठाए गए सवालों का गुण-दोष के आधार पर निपटारा किया जाएगा या फिर सोनम को पूछताछ के लिए आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया जा सकता है। इसके बाद जमानत पर आगे विचार होगा।


मेघालय सरकार ने जमानत को दी है चुनौती

सोनम रघुवंशी पर अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या की साजिश रचने और उसे अंजाम देने का आरोप है। मेघालय सरकार ने निचली अदालत से मिली जमानत और उसे बरकरार रखने वाले मेघालय हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।


सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने सुनवाई के दौरान सोनम के वकील से कहा कि अदालत के सामने दो विकल्प हैं—

  • जमानत विवाद पर गुण-दोष के आधार पर फैसला सुनाया जाए।

  • या फिर सोनम को आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया जाए ताकि उससे पूछताछ हो सके और इस दौरान जमानत पर विचार किया जाए।


सोनम के वकील ने मांगा समय

सुनवाई के दौरान सोनम की ओर से पेश वकील ने अदालत से निर्देश लेने के लिए समय मांगा। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि गुरुवार तक इस मामले में अपना जवाब दाखिल कर दिया जाएगा।


अदालत ने आचरण पर भी उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान पीठ ने घटना के बाद सोनम के व्यवहार पर भी सवाल किए। अदालत ने यह भी स्पष्टीकरण मांगा कि पहले की कार्यवाही में यह दलील क्यों नहीं दी गई कि गिरफ्तारी के समय उसे गिरफ्तारी के कारण नहीं बताए गए थे।


मेघालय सरकार की ओर से क्या दलील दी गई

भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सोनम की जमानत का विरोध करते हुए कहा कि उसने पुलिस के सामने स्वेच्छा से आत्मसमर्पण किया था। उनका कहना था कि ऐसी स्थिति में बाद में यह तर्क नहीं दिया जा सकता कि गिरफ्तारी के कारण नहीं बताए गए। उन्होंने गिरफ्तारी मेमो में किसी भी कमी को केवल लिपिकीय त्रुटि बताया।


गिरफ्तारी को लेकर सॉलिसिटर जनरल का पक्ष

तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि यदि कोई आरोपी रंगे हाथों पकड़ा जाता है, तो गिरफ्तारी के कारण अलग से बताने की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने यह भी दलील दी कि जब कोई व्यक्ति स्वयं पुलिस के पास आत्मसमर्पण करता है, तब वह बाद में गिरफ्तारी के कारण न बताए जाने के आधार पर अपनी गिरफ्तारी को चुनौती नहीं दे सकता।

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