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राजेंद्र भारती को राहत मिलेगी या बढ़ेगी मुश्किल? 15 अप्रैल की सुनवाई तय करेगी दतिया की सियासी दिशा, उधर नरोत्तम से मिले बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष

07 अप्रैल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
राजेंद्र भारती को राहत मिलेगी या बढ़ेगी मुश्किल? 15 अप्रैल की सुनवाई तय करेगी दतिया की सियासी दिशा, उधर नरोत्तम से मिले बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज है। सजा के बाद विधायकी गंवा चुके कांग्रेस नेता राजेंद्र भारती के मामले में अब सबकी नजरें 15 अप्रैल पर टिक गई हैं।


दिल्ली हाई कोर्ट ने मांगा जवाब, अगली सुनवाई तय

दिल्ली हाई कोर्ट ने राजेंद्र भारती की याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश पुलिस से जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने मामले को गंभीर मानते हुए अगली तारीख 15 अप्रैल तय की है। अब यह सुनवाई तय करेगी कि भारती को राहत मिलेगी या कानूनी मुश्किलें और बढ़ेंगी।


3 साल की सजा और गई विधायकी

इससे पहले 2 अप्रैल को एमपी-एमएलए कोर्ट ने बैंक धोखाधड़ी मामले में राजेंद्र भारती को 3 साल की सजा सुनाई थी। हालांकि उन्हें 60 दिन की अंतरिम जमानत दी गई, ताकि वे हाई कोर्ट में अपील कर सकें। सजा के तुरंत बाद उनकी विधायकी खत्म हो गई और दतिया सीट खाली हो गई—यहीं से राजनीति गरमा गई।


दतिया सीट पर बढ़ी सियासी हलचल

दतिया सीट खाली होते ही संभावित उपचुनाव की चर्चा तेज हो गई है। यह सीट लंबे समय तक भाजपा के दिग्गज नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा का मजबूत गढ़ रही है। पिछले चुनाव में उन्हें राजेंद्र भारती से हार मिली थी, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। यही वजह है कि इस सीट पर फिर से मुकाबला दिलचस्प होने के संकेत मिल रहे हैं।


भाजपा में रणनीति तेज, बंद कमरे में चर्चा

इसी बीच भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने डॉ. नरोत्तम मिश्रा से मुलाकात की। करीब 30 मिनट चली इस बैठक को दतिया उपचुनाव की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इसे आने वाले चुनावी समीकरणों का संकेत माना जा रहा है।


15 अप्रैल बनेगी टर्निंग पॉइंट?

विश्लेषकों का मानना है कि 15 अप्रैल की सुनवाई सिर्फ कानूनी फैसला नहीं होगी, बल्कि इसका सीधा असर दतिया की राजनीति पर पड़ेगा। अगर राहत मिलती है तो समीकरण बदल सकते हैं, और अगर नहीं—तो उपचुनाव लगभग तय माना जाएगा। यानी आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी के साथ-साथ राजनीतिक रूप से भी बेहद निर्णायक साबित हो सकता है।

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