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65 हजार बूथ संभालने वाले नेता को मिला बड़ा इनाम, एमपी बीजेपी ने बनाया राज्यसभा उम्मीदवार

05 जून, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
65 हजार बूथ संभालने वाले नेता को मिला बड़ा इनाम, एमपी बीजेपी ने बनाया राज्यसभा उम्मीदवार
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों पर होने वाले चुनाव से पहले बीजेपी ने बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। पार्टी ने अपनी दो सीटों के लिए राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग और प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया है। खास बात यह है कि संगठन में पर्दे के पीछे काम करने वाले रजनीश को पार्टी के भीतर 'बूथ का भूत' कहा जाता है। राजनीतिक गलियारों में अब सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की है कि आखिर संगठन का यह रणनीतिकार राज्यसभा तक कैसे पहुंचा?


65 हजार बूथों के पीछे था रजनीश का मॉडल

साल 2021 से रजनीश अग्रवाल मध्य प्रदेश बीजेपी में बूथ प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनके नेतृत्व में प्रदेश के करीब 65 हजार बूथों का डिजिटाइजेशन किया गया। यही नहीं, बूथों को A, B, C और D कैटेगरी में बांटकर चुनावी रणनीति तैयार की गई। पार्टी सूत्रों के अनुसार विधानसभा और लोकसभा चुनावों में वोट शेयर बढ़ाने की कई योजनाओं के पीछे भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।


30 वोटरों पर अर्द्धपन्ना प्रभारी, बना चुनावी हथियार

बीजेपी संगठन ने बूथ स्तर तक पकड़ मजबूत करने के लिए प्रत्येक 30 मतदाताओं पर अर्द्धपन्ना प्रभारी नियुक्त करने की रणनीति अपनाई थी। इस मॉडल को जमीन पर लागू करने में रजनीश अग्रवाल की बड़ी भूमिका मानी जाती है। संगठन में उनकी पहचान चुनावी प्रबंधन और माइक्रो प्लानिंग के विशेषज्ञ के रूप में रही है।


सवर्ण प्रतिनिधित्व का समीकरण भी बना वजह

मध्य प्रदेश से वर्तमान में राज्यसभा में बीजेपी के 8 सांसद हैं। इनमें ओबीसी, एससी, एसटी और अल्पसंख्यक वर्ग का प्रतिनिधित्व रहा, लेकिन सामान्य वर्ग का कोई सांसद नहीं था। पार्टी नेतृत्व ने इस बार सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए किसी सवर्ण चेहरे को राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया। इसी समीकरण ने रजनीश अग्रवाल की दावेदारी को मजबूती दी।


कई दिग्गजों को पीछे छोड़कर मिला मौका

राज्यसभा उम्मीदवारों की चर्चा में पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा, डॉ. अरविंद भदौरिया, कैलाश विजयवर्गीय, मुन्नालाल गोयल और अन्य नेताओं के नाम भी शामिल थे। हालांकि पार्टी के भीतर यह राय बनी कि अवसर ऐसे कार्यकर्ता को दिया जाए जिसे हाल के चुनावों में कोई बड़ा मौका नहीं मिला हो। संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहने और चुनावी रणनीतियों में योगदान के कारण अंततः रजनीश अग्रवाल के नाम पर सहमति बनी।


पैरों से दिव्यांग, लेकिन संगठन में सबसे सक्रिय चेहरों में शामिल

सागर जिले के मंडीबामोरा कस्बे से आने वाले रजनीश अग्रवाल पैरों से दिव्यांग हैं। इसके बावजूद उन्हें पार्टी के सबसे सक्रिय संगठनात्मक नेताओं में गिना जाता है। पत्रकारिता के छात्र रहे अग्रवाल पहले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े और बाद में बीजेपी संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने लगे। उनकी कार्यशैली ने उन्हें प्रदेश नेतृत्व के करीब पहुंचाया।


वीडी शर्मा और शिवराज का भी मिला समर्थन

रजनीश अग्रवाल को प्रदेश भाजपा में बूथ प्रबंधन की जिम्मेदारी तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने सौंपी थी। वे उनकी टीम में प्रदेश मंत्री भी रहे। सूत्रों के मुताबिक, जब इस बार सवर्ण चेहरे को राज्यसभा भेजने का फॉर्मूला बना तो वीडी शर्मा ने उनका नाम आगे बढ़ाया। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी उनके नाम पर सहमति जताई।


"मैं टिकट मांगने भी नहीं गया"

उम्मीदवार घोषित होने के बाद रजनीश अग्रवाल ने कहा कि यह केवल बीजेपी में ही संभव है कि एक सामान्य कार्यकर्ता को राज्यसभा जैसे उच्च सदन तक पहुंचने का अवसर मिले। उन्होंने बताया कि वे संकोचवश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से टिकट की मांग करने तक नहीं गए। उन्होंने पार्टी नेतृत्व का आभार जताते हुए इसे संगठन के कार्यकर्ताओं के सम्मान का उदाहरण बताया।


तरुण चुग को एमपी से क्यों भेज रही बीजेपी?

बीजेपी ने दूसरी सीट पर राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग को उम्मीदवार बनाया है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार पंजाब की राजनीति और संगठनात्मक संतुलन को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने यह फैसला लिया है। तरुण चुग लंबे समय से पंजाब की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर नई जिम्मेदारी देने की रणनीति बनाई है।


क्या संदेश देना चाहती है बीजेपी?

राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन से बीजेपी ने साफ संकेत दिया है कि पार्टी केवल चुनाव जीतने वाले चेहरों पर ही नहीं, बल्कि संगठन के लिए लंबे समय तक काम करने वाले कार्यकर्ताओं पर भी भरोसा करती है।


रजनीश अग्रवाल का राज्यसभा पहुंचना संगठन में काम कर रहे हजारों कार्यकर्ताओं के लिए भी एक बड़ा संदेश माना जा रहा है कि पर्दे के पीछे की मेहनत भी एक दिन राष्ट्रीय राजनीति का रास्ता खोल सकती है।

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