
भोपाल। कृषि विभाग में सरकारी नौकरी का सपना देख रहे युवाओं के लिए आखिरकार खुशखबरी आ गई है। लंबे इंतजार के बाद मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) ने सहायक संचालक कृषि के पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का ऐलान कर दिया है। खास बात यह है कि इस बार आरक्षण का पैटर्न सामान्य भर्तियों से बिल्कुल अलग है, जिसे देखकर अभ्यर्थियों के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
71 पदों पर भर्ती, लेकिन जनरल और EWS को झटका
इस भर्ती के तहत कुल 71 पद भरे जाएंगे, लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि:
सामान्य वर्ग (General) – 0 पद
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) – 0 पद
अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) – 47 पद
अनुसूचित जाति (SC) – 14 पद
अनुसूचित जनजाति (ST) – 10 पद
यानि इस बार पूरी भर्ती आरक्षित वर्गों के लिए ही निकाली गई है। MPPSC की ऐसी भर्ती लंबे समय बाद सामने आई है, जहां सामान्य और EWS वर्ग को एक भी सीट नहीं दी गई है। यही वजह है कि सोशल मीडिया से लेकर कोचिंग संस्थानों तक इस आरक्षण पैटर्न पर चर्चा हो रही है।
25 अप्रैल से शुरू होंगे आवेदन, 24 मई तक मौका
जो उम्मीदवार इस भर्ती में शामिल होना चाहते हैं, वे 25 अप्रैल से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन की अंतिम तिथि 24 मई तय की गई है।
आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन
उम्मीदवारों को सलाह है कि अंतिम दिन का इंतजार न करें
फीस भुगतान और फॉर्म सबमिशन समय रहते पूरा कर लें
आयोग की ओर से जल्द ही विस्तृत नोटिफिकेशन भी जारी किया जाएगा, जिसमें शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा और परीक्षा पैटर्न की पूरी जानकारी होगी।
22 नवंबर को होगी ऑफलाइन परीक्षा, OMR शीट पर देंगे जवाब
सहायक संचालक कृषि भर्ती की परीक्षा इस बार ऑफलाइन मोड में कराई जाएगी। उम्मीदवारों को OMR शीट पर उत्तर भरने होंगे।
परीक्षा तिथि: 22 नवंबर
प्रवेश पत्र: परीक्षा से करीब 10 दिन पहले जारी होंगे
परीक्षा केंद्र:
भोपाल
इंदौर
जबलपुर
ग्वालियर
चार बड़े शहरों में केंद्र बनाए जाने से उम्मीदवारों को आने-जाने में भी सुविधा रहेगी।
सहायक संचालक कृषि की भूमिका क्या होती है?
यह पद केवल सरकारी नौकरी नहीं, बल्कि किसानों की जिंदगी से सीधा जुड़ा हुआ है। सहायक संचालक कृषि की जिम्मेदारियां होती हैं:
सरकारी कृषि योजनाओं का जिले में क्रियान्वयन
किसानों को नई तकनीक और उन्नत बीजों की जानकारी देना
फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता
कृषि विभाग के मैदानी अमले का समन्वय
इस पद पर चयनित अधिकारी सीधे तौर पर खेती की दशा और दिशा बदलने में अहम भूमिका निभाते हैं।
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