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राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव ने सेंट्रल जेल का किया निरीक्षण, कहा - व्यक्तित्व निर्माण, आत्मविश्वास और पुनर्वास का केंद्र होना चाहिए सुधार गृह

11 जून, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव ने सेंट्रल जेल का किया निरीक्षण, कहा - व्यक्तित्व निर्माण, आत्मविश्वास और पुनर्वास का केंद्र होना चाहिए सुधार गृह
Hitesh Kumar Singh
डेस्क रिपोर्टर
Hitesh Kumar Singh

भोपाल। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव ने सेंट्रल जेल का निरीक्षण किया और वहां की व्यवस्थाएं देखीं। उन्होंने कहा कि सुधारगृह केवल दंड का स्थान नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, आत्मविश्वास और पुनर्वास का केंद्र होना चाहिए। 


आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि महिला बंदियों को सम्मानजनक वातावरण, आवश्यक सुविधाएं और कौशल विकास के अवसर उपलब्ध कराना समाज और शासन दोनों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आयोग यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि प्रत्येक महिला को उसके अधिकारों, सम्मान और न्याय तक पहुंच प्राप्त हो। निरीक्षण के दौरान आयोग की सदस्य साधना स्थापक भी मौजूद रहीं। 


आयोग की अध्यक्ष और सदस्य ने महिला बंदियों से संवाद कर उनकी समस्याओं, आवश्यकताओं और पुनर्वास संबंधी व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त की। जेल प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का जायजा लिया। आयोग की टीम ने महिला वार्ड, चिकित्सालय, रसोईघर, पुस्तकालय, सांस्कृतिक कक्ष, आर्ट एवं क्राफ्ट सेंटर तथा ब्यूटी पार्लर का अवलोकन किया। राज्य महिला आयोग के सचिव सुरेश तोमर, केंद्रीय जेल भोपाल के अधीक्षक राकेश भांगरे सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।


महिला बंदियों के ऑर्केस्ट्रा दल ने भजनों की प्रस्तुति दी 

सांस्कृतिक कक्ष में महिला बंदियों की ओर से संचालित ऑर्केस्ट्रा दल ने भजनों की प्रस्तुति दी । इसकी आयोग की अध्यक्ष और सदस्य ने सराहना की। इसे सकारात्मक मानसिक विकास और सामाजिक पुनर्स्थापन की दिशा में प्रभावी पहल बताया। महिला बंदियों से संवाद के दौरान उनकी दिनचर्या, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, कौशल विकास कार्यक्रमों और पुनर्वास गतिविधियों से जुड़ी जानकारी प्राप्त की। 


बंदियों की रचनात्मकता, आत्मविश्वास और कौशल की प्रशंसा की

राज्य महिला आयोग की टीम ने बंदियों की ओर से आर्ट एवं क्राफ्ट सेंटर में तैयार किए गए विभिन्न उत्पादों का अवलोकन भी किया गया। अध्यक्ष रेखा यादव ने महिला बंदियों की रचनात्मकता, आत्मविश्वास और कौशल की प्रशंसा की और उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के साथ समाज में नई पहचान बनाने का अवसर प्रदान कर रहे हैं।



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