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संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत बोले- संपूर्ण समाज के योगदान से ही कोई भी देश होता है बड़ा, युवाओं से किया ये आह्वान…

02 जन, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
RSS chief Dr Mohan Bhagwat

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Hitesh Kumar Singh
डेस्क रिपोर्टर
Hitesh Kumar Singh

भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने शुक्रवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में युवाओं से संवाद किया। उन्होंने कहा कि कोई भी देश संपूर्ण समाज के योगदान से ही बड़ा होता है। नेता, नीति और व्यवस्था, ये सब तब सहायक होते हैं, जब समाज गुणसम्पन्न होता है। भारत का युवा जाग गया है, वह अपने देश को समर्थ बनाना चाहता है। 

डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि संघ युवाओं से आह्वान करता है कि वे संघ की शाखा में आएं या फिर संघ की योजना से चल रहे अपने रुचि के कार्य में जुड़कर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि संघ अपने जन्म से ही लक्ष्य लेकर चल रहा है कि अपने धर्म-संस्कृति का संरक्षण कर, अपने भारत को परम वैभव पर लेकर जाना है। संघ का प्रत्येक स्वयंसेवक यह प्रतिज्ञा करता है। 

 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के प्रसंग पर सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का देशभर में प्रवास हो रहा है। इसी कड़ी में उनका दो दिवसीय प्रवास भोपाल में हुआ है। प्रवास के पहले दिन संघ की ओर से आयोजित 'युवा संवाद' कार्यक्रम में मध्यभारत प्रान्त के 16 शासकीय जिलों के युवाओं को संघ प्रमुख ने संबोधित किया। 

 

कार्यक्रम के प्रथम सत्र में अखिल भारतीय सह बौद्धिक प्रमुख दीपक विस्पुते और भोपाल करुणा धाम के प्रमुख सुदेश शांडिल्य जी महाराज ने युवाओं को संबाेधित किया। इस अवसर पर मंच पर मध्यभारत प्रांत के सह संघचालक डॉ. राजेश सेठी उपस्थित रहे।


देशभक्ति सिखाती है संघ की शाखा 

संघ प्रमुख ने कहा कि यदि हमें देश के लिए कुछ करना है तो इस मार्ग में हमें गुणों को धारण करना होगा और अहंकार एवं स्वार्थ छोड़ने होंगे। दुनिया में संघ ने ही एकमात्र ऐसी पद्धति दी है, जो अच्छी आदतें विकसित करती है। उन्होंने कहा कि संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार हर क्षेत्र में कार्य करते थे। लेकिन उन्हें चिंता यह थी कि देश में एकता कैसे स्थापित होगी। इस भाव को उत्पन्न करने वाले संगठन का नाम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ है। दुनिया में कहीं दूसरी पद्धति नहीं है व्यक्ति निर्माण की। उन्होंने कहा कि संघ की शाखा देशभक्ति सिखाती है। यदि इसका अनुभव लेना है और उद्देश्य को जीना है तो शाखा एकमात्र जगह है। यहां कोई बंधन नहीं है। 

युवाओं को ही देश बनाना है

सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि हम कई बार असुरक्षा और चिंता के साथ जीते हैं, लेकिन इसकी बजाय हमें भयमुक्त होकर जीना चाहिए। स्वयं से पहले देश को रखना चाहिए। अपने विकास से देश और परिवार प्रगति कर रहा है कि नहीं यह सोचना चाहिए। युवाओं को ही देश बनाना है और वे हर बात में आगे भी आते हैं। उन्होंने कहा कि जब आप देश की बात करते हैं तो प्रश्नों के जवाब देने होंगे और उसके लिए योग्यता लाना पड़ेगी। संघ में आकर तैयार होना पड़ेगा। 

 

 

हमें एआई को कंट्रोल करना है 

युवा संवाद में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने युवाओं द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दिए। सुरक्षा और करियर को लेकर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में कहा कि सुरक्षा की गारंटी कोई नहीं दे सकता। बिना चिंता जीवन जिए। मनुष्य अलग है, क्योंकि वह रिस्क लेता है। दुनिया सक्सेस को देखती है, लेकिन जैसे ही उस पथ पर चलने की कोशिश करते हैं तो संघर्ष देखकर डर जाते हैं। इसलिए बेहतर करियर वह है, जिसमें आप उत्कृष्ट प्रदर्शन कर पाएं और डर भी न लगे। सुविधा से सुख नहीं मिलता। एआई के सवाल पर बोले कि हमें एआई को कंट्रोल करना है, न कि कंट्रोल होना है। उसका उपयोग विकास में करना है। हमें ऐसे युवाओं का निर्माण करना है जो एआई या अन्य तकनीक का उपयोग देश हित में करें। 

 

विरोधियों ने कभी संघ को समझने का प्रयास नहीं किया: दीपक विस्पुते

अखिल भारतीय सह बौद्धिक प्रमुख दीपक विस्पुते ने संघ की 100 साल की यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संघ को 100 वर्ष में खूब प्रसिद्ध मिली। संघ का प्रचार विरोधियों ने नकारात्मक भाव में किया। इन्होंने कभी संघ को समझने का प्रयास नहीं किया। उन्होंने बताया कि संघ वर्ष 1925 में नागपुर से प्रारंभ हुआ और जिस तरह भागीरथ ने गंगा पृथ्वी पर लेकर आए ठीक वैसे डा. केशव बलिराम हेडगेवार जी ने संघ कार्य को समाज के बीच लेकर गए। इसके पहले भारत में कभी इस तरह का प्रयास नहीं हुआ। डॉक्टर साहब ने नागपुर की बजाय कोलकता को पढ़ाई के लिए चुना और स्वतंत्रता की लड़ाई में भाग लिया। लेकिन उन्हें महसूस हुआ कि देश के हिन्दू समाज को मानसिक गुलामी से मुक्त कराना होगा। 

 

संघ युवाओं को सामर्थ्यवान बना रहा: सुदेश शांडिल्य

भोपाल करुणा धाम के प्रमुख सुदेश शांडिल्य महाराज ने युवाओं से कहा कि अक्सर हम सुनते हैं “समरथ को नहीं दोष गुसाई”। इसका यह मतलब नहीं है कि कोई बलवान है, उसको दोष नहीं दिया जाता। वास्तव समर्थ वह है जिसकी नीयत में दोष नहीं हो। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समर्थ बनेगा तभी भारत विश्वगुरु बनेगा। इसलिए संघ का समर्थ होना जरूरी है। परोपकार, सद्चरित्र, जनकल्याण की भावना और यश के पीछे नहीं भागने की भावना कहीं दिखाई दे रही है, तो वह केवल संघ है। उन्होंने कहा कि भारत में युवाओं को सामर्थ्यवान बनाने का काम केवल संघ कर रहा है। उसकी शाखाओं में 100 साल से व्यक्ति का निर्माण हो रहा है। 

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