
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी एक बार फिर एक बड़े संगठनात्मक जमावड़े की मेजबानी करने जा रही है। 4 और 5 अप्रैल 2026 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का दो दिवसीय समन्वय वर्ग यहां आयोजित होगा। यह महज एक बैठक नहीं — बल्कि संघ और उसके सहयोगी संगठनों की आने वाले समय की दिशा तय करने का मंच होगा।
क्या होता है समन्वय वर्ग — और यह क्यों है खास?
RSS का समन्वय वर्ग एक ऐसी विशेष बैठक होती है जिसमें संघ के साथ-साथ उसके आनुषांगिक संगठनों के वरिष्ठ पदाधिकारी एक मंच पर आते हैं। सभी संगठनों के बीच तालमेल मजबूत करना और आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करना इसका मूल उद्देश्य होता है। भोपाल में होने वाला यह वर्ग इसलिए भी विशेष है क्योंकि इसमें संघ के शताब्दी वर्ष को लेकर विस्तृत चर्चा होगी — एक ऐसा पड़ाव जो संगठन के लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है।
VHP, सेवा भारती समेत कई संगठनों की होगी भागीदारी
इस समन्वय वर्ग में विश्व हिंदू परिषद, सेवा भारती और संस्कार भारती सहित कई प्रमुख सहयोगी संगठनों के पदाधिकारी शामिल होंगे। हेमंत खंडेलवाल भी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे। यह सभी संगठन मिलकर न केवल बीते कामों की समीक्षा करेंगे, बल्कि आगे की साझा रणनीति भी तैयार करेंगे। एक छत के नीचे इतने संगठनों का एकत्रित होना इस वर्ग को और अधिक महत्वपूर्ण बनाता है।
पंच परिवर्तन और शताब्दी वर्ष — केंद्र में रहेंगे ये दो बड़े विषय
बैठक के एजेंडे में पंच परिवर्तन एक प्रमुख विषय होगा। इसके तहत समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की योजनाओं पर गहन मंथन होगा। साथ ही संघ की कार्यपद्धति और नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने के तरीकों पर भी विचार-विमर्श होगा। शताब्दी वर्ष को देखते हुए यह चर्चाएं संगठन की दीर्घकालिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
बौद्धिक और शारीरिक सत्र भी होंगे — वरिष्ठ नेता होंगे मुख्य वक्ता
यह कार्यक्रम सिर्फ चर्चा-सत्रों तक सीमित नहीं रहेगा। बौद्धिक और शारीरिक सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। दीपक विस्पुते और मनमोहन वैद्य जैसे वरिष्ठ पदाधिकारी किसी सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हो सकते हैं। इन सत्रों के जरिए कार्यकर्ताओं को संगठन की विचारधारा और कार्यशैली से और गहराई से जोड़ा जाएगा — ताकि जमीनी स्तर पर काम और मजबूत हो सके।
भोपाल बना संगठनात्मक गतिविधियों का केंद्र
यह पहली बार नहीं है जब भोपाल किसी बड़े संगठनात्मक कार्यक्रम की मेजबानी कर रहा है। राजधानी होने के नाते यह शहर बार-बार ऐसे महत्वपूर्ण आयोजनों का मंच बनता है। 4 और 5 अप्रैल को होने वाले इस समन्वय वर्ग से यह तय होगा कि संघ और उसके सहयोगी संगठन शताब्दी वर्ष की ओर किस रोडमैप के साथ आगे बढ़ेंगे।
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