
सागर आने वाले 4 से 5 वर्षों में मध्य प्रदेश के सबसे अहम सड़क संपर्क केंद्रों में शामिल हो सकता है। शहर से कई राष्ट्रीय राजमार्गों और फोरलेन परियोजनाओं के जुड़ने के बाद भोपाल, दिल्ली, कानपुर, नागपुर, जबलपुर, प्रयागराज, रायपुर, विशाखापट्टनम और कोटा जैसे शहरों तक सफर अधिक सुविधाजनक होने की उम्मीद है।
सागर की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यहां से गुजर रही और प्रस्तावित सड़क परियोजनियां पूरे बुंदेलखंड की कनेक्टिविटी को मजबूत करेंगी। इसी वजह से सागर को अब नेशनल हाईवे जंक्शन के रूप में देखा जा रहा है।
सागर से गुजर रहा देश का सबसे लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग
देश का सबसे लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (NH-44) सागर जिले से करीब 162 किलोमीटर तक गुजरता है। यह हाईवे 11 राज्यों और 31 शहरों को आपस में जोड़ता है, जिससे सागर की रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है।
भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर पर तेजी से काम
करीब 368 किलोमीटर लंबा भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर अलग-अलग हिस्सों में निर्माणाधीन है। यह परियोजना दो राज्यों, सात जिलों और दो प्रमुख शहरों को जोड़ने का काम करेगी।
इस कॉरिडोर के 2027 तक पूरा होने का लक्ष्य है। इसके बाद भोपाल और कानपुर के बीच सड़क संपर्क पहले की तुलना में अधिक सुगम होगा।
बुंदेलखंड और राजस्थान तक भी मिलेगा बेहतर सड़क नेटवर्क
सागर से सतना तक लगभग 300 किलोमीटर लंबे अपग्रेडेड फोरलेन मार्ग का प्रस्ताव तैयार किया गया है। यह मार्ग दमोह के जरिए सागर को जोड़ेगा और सतना से प्रयागराज की दिशा में सड़क संपर्क को भी आसान बनाएगा।
इसके अलावा सागर-विदिशा-कोटा ग्रीनफील्ड फोरलेन हाईवे भी प्रस्तावित है, जिससे राजस्थान तक सीधी सड़क कनेक्टिविटी मिलने की संभावना है।
बाईपास परियोजनाओं से शहर में घटेगा ट्रैफिक
शहर के भीतर भारी वाहनों का दबाव कम करने के लिए 20 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड पश्चिमी बाईपास के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है।
वहीं 28 किलोमीटर लंबे एक अन्य बाईपास का करीब 90% निर्माण पूरा हो चुका है। यह नेटवर्क आगे चलकर सागर रिंग रोड से जुड़ेगा, जिससे अलग-अलग फोरलेन और राष्ट्रीय राजमार्ग एक-दूसरे से कनेक्ट होंगे।
चार दिशाओं में मजबूत होगी कनेक्टिविटी
सागर से जुड़े कई फोरलेन और राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माणाधीन हैं, जबकि कुछ परियोजनाएं प्रस्तावित चरण में हैं। इनके पूरा होने के बाद शहर चारों दिशाओं में बेहतर सड़क संपर्क वाला प्रमुख ट्रांसपोर्ट हब बन सकता है, जिसका लाभ पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र को मिलेगा।
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