गुरुवार, 02 अप्रैल 2026
Logo
Madhaya Pradesh

सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन वाराणसी में 3 अप्रैल से, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बाबा विश्वनाथ को विक्रमादित्य वैदिक घड़ी करेंगे अर्पित

02 अप्रैल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन वाराणसी में 3 अप्रैल से, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बाबा विश्वनाथ को विक्रमादित्य वैदिक घड़ी करेंगे अर्पित
Hitesh Kumar Singh
डेस्क रिपोर्टर
Hitesh Kumar Singh

भोपाल। विक्रमोत्सव 2026 के तहत 3 अप्रैल से वाराणसी में महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य का मंचन किया जाएगा। इसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य आतिथि के रूप में शामिल होंगे। वहीं, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बाबा विश्वनाथ को विक्रमादित्य वैदिक घड़ी अर्पित करेंगे। 

उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन और न्यायप्रियता को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का आयोजन किया जा रहा है। महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के माध्यम से बीएलडब्ल्यू मैदान आयोजित होने वाले इस महानाट्य की परिकल्पना मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की है। पद्मश्री डॉ. भगवतीलाल राजपुरोहित की ओर से रचित और राजेश कुशवाहा द्वारा निर्मित और संजीव मालवी के निर्देशन में प्रस्तुत महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य भारत की सांस्कृतिक चेतना को जगाने वाला अनुभव है।


महानाट्य में 200 से ज्यादा कलाकार हाथी, घोड़े, रथ, पालकियां, भव्य युद्ध, लाइट शो, आतिशबाजी नृत्य और बाबा महाकाल की भस्म आरती की दिव्य झलकियां शामिल है। महान सम्राट विक्रमादित्य के जन्म से राजतिलक तक की गाथा, विक्रम बेताल की कथा और सनातन धर्म के उत्थान की महा काव्य कथा इस महानाट्य में जीवंत होगी। महानाट्य को विराट और जीवंत स्वरूप प्रदान करने के लिए तीन भव्य मंचों का निर्माण किया जा रहा है। केंद्र में 80×62 का मुख्य मंच और दोनों ओर 42×42 के बाएं और दायें मंच तैयार किए जा रहे हैं। 


मंचों पर सिंहासन बत्तीसी, बेताल पच्चीसी और भविष्य पुराण के प्रसंगों के माध्यम से सम्राट विक्रमादित्य के अद्वितीय व्यक्तित्व, सुशासन और न्यायप्रियता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही उनके दरबार के नवरत्न-कालिदास, वराहमिहिर सहित अन्य विद्वानों की विद्वता का भी सजीव चित्रण होगा। बाएं मंच पर महाकाल मंदिर की भव्य संरचना और 8 फीट के शिवलिंग पर दिव्य भस्म आरती का अलौकिक दृश्य आकर्षण का केंद्र बनेगा। महानाट्य को और अधिक जीवंत बनाने के लिए 18 घोड़े, 2 रथ, 4 ऊँट, 1 पालकी और 1 हाथी के साथ भव्य प्रस्तुतिकरण किया जाएगा। 


विक्रमादित्य वैदिक घड़ी  की विशेषताएं

समय का वैज्ञानिक और सटीक विभाजन

एक दिन = 30 मुहूर्त

दो सूर्योदय के बीच

. 30 मुहूर्त (घंटे)

. 30 काल (मिनट)

. 30 काष्ठा (सेकंड)


विक्रमादित्य वैदिक घड़ी में वैदिक समय विभाजन तालिका

(सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक)

. मुहूर्त : एक दिन में 30 मुहूर्त होते हैं, जिनकी अवधि लगभग 48 मिनट होती है।

. कला : एक दिन में 900 कला होती हैं (30×30), जिनकी अवधि लगभग 96 सेकंड होती है।

. काष्ठा : एक दिन में 27,000 काष्ठा होती हैं (30×30×30), जिनकी अवधि लगभग 3.2 सेकंड होती है।


विक्रमादित्य वैदिक घड़ी ऐप की विशेषताएं

. वैदिक घड़ी : 30 घंटे की वास्तविक वैदिक समय प्रणाली

. पंचांग और विक्रम संवत कैलेंडर : 5800 वर्षों के लिए उपलब्ध

. मुहूर्त अलार्म : हर मुहूर्त के शुभ-अशुभ संकेत और अलार्म सेटिंग

. स्थान और मौसम : आपके शहर का लाइव तापमान, हवा, आर्द्रता

. 180+ भाषाओं में उपलब्ध

पाठकों की राय (0)

इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

अपनी प्रतिक्रिया दें