
भोपाल। अब साड़ी सिर्फ परिधान नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने की पहचान बनेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट कहा है कि इंदौर की तर्ज पर पूरे मध्यप्रदेश में साड़ी वॉकथान आयोजित किए जाएं, ताकि साड़ी पहनने की परम्परा को और मजबूती मिले। समत्व भवन में कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि मृगनयनी समेत विभाग के सभी ब्रांडों के विक्रय केन्द्र जिला स्तर तक खोले जाएं और इन्हें स्वसहायता समूहों व लाडली बहनों से जोड़ा जाए।
मृगनयनी से महेश्वरी तक, ब्रांड का विस्तार जिला स्तर तक
मुख्यमंत्री ने कहा कि मृगनयनी और कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग के अन्य ब्रांड्स की फ्रेंचाइजी निजी उद्यमियों को दी जाए, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ें।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि हस्तशिल्प उत्पादों को प्रदेश के प्रमुख धार्मिक केन्द्रों और धार्मिक मेलों में प्रदर्शित व विक्रय के लिए उपलब्ध कराया जाए, ताकि देसी उत्पादों को नया बाजार मिल सके। बैठक में बताया गया कि प्रधानमंत्री कार्यालय में अतिथियों को भेंट करने के लिए प्रदेश के हेरिटेज महेश्वरी स्टोल का चयन किया गया है। ये स्टोल गोंड पेंटिंग और बेलमेटल से सुसज्जित लकड़ी के बॉक्स में प्रस्तुत किए जा रहे हैं। खास बात यह है कि इनकी मांग अब विदेशी दूतावासों से भी आने लगी है।
27 हजार महिलाओं की भागीदारी, कूनो चीता थीम पर नए गिफ्ट आइटम
इंदौर में 7 मार्च को आयोजित साड़ी वॉकथान में 27 हजार महिलाओं ने भागीदारी की थी, जिसने पूरे प्रदेश में नई मिसाल कायम की। अब यही मॉडल ग्वालियर, उज्जैन, सागर, जबलपुर और अन्य शहरों में भी दोहराया जाएगा। इसके साथ ही कूनो चीता अभ्यारण्य के लिए प्रदेश की 35 से अधिक क्रॉफ्ट्स पर आधारित चीता थीम गिफ्ट आइटम तैयार किए जा रहे हैं, ताकि पर्यटन स्थलों पर स्थानीय हस्तशिल्प को बढ़ावा मिले।
लाडली बहनों को मिलेगा लूम-चरखा, पायलट प्रोजेक्ट से बदलेगी तस्वीर
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि चयनित जिलों में लाडली बहनों को लूम और चरखा उपलब्ध कराकर पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए जाएं। इस योजना में निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि उत्पादन बढ़े और महिलाओं को घर बैठे रोजगार मिल सके।
अगले तीन साल की बड़ी कार्ययोजना, खादी-हस्तशिल्प को मिलेगी नई उड़ान
सरकार ने कुटीर एवं ग्रामोद्योग के लिए आगामी तीन वर्षों की ठोस कार्ययोजना भी तैयार की है—
ग्वालियर तेलघानी केन्द्र का उन्नयन और उत्पादन में वृद्धि
उज्जैन, देवास, सागर, महेश्वर और बुरहानपुर में स्फूर्ति योजना के तहत खादी, प्रोसेसिंग और चर्म सामग्री निर्माण का विस्तार
भोपाल में बुटिक, ब्लॉक प्रिंट, जरी-जरदोजी, सिलाई और माटीकला पर केन्द्रित सामान्य सुविधा केन्द्र
1700 बुनकरों को प्रशिक्षण और 800 बुनकरों को उन्नत उपकरण
खादी वस्त्र उत्पादन क्षमता को दुगुना करना
देवास के ग्राम बालगढ़ में 15 करोड़ की लागत से पोनी प्लांट
जबलपुर में खादी ग्रामोद्योग एम्पोरियम का नवीनीकरण
भोपाल के चित्तौड़ कॉम्पलेक्स, एमपी नगर में खादी मॉल
उज्जैन में खादी एम्पोरियम का संचालन
उज्जैन और अनूपपुर में लूम-चरखा आधारित पायलट प्रोजेक्ट
मिट्टी की मूर्तियां, टेराकोटा और माटीकला को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम
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