
भोपाल। महिला एवं बाल विकास विभाग ने शक्ति सदन और मिशन वात्सल्य से जुड़ी अशासकीय बाल देखरेख संस्थाओं की अनुदान व्यवस्था को डिजिटल बनाने की शुरुआत कर दी है। मंत्री निर्मला भूरिया ने मंगलवार को मंत्रालय में दोनों योजनाओं के लिए अनुदान ई-पोर्टल का शुभारंभ किया।
नए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आवेदन से लेकर भुगतान और संस्थाओं की प्रगति की निगरानी तक की प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। इससे विभाग को रियल टाइम स्थिति देखने और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर निर्णय लेने में सुविधा मिलेगी।
एक ही पोर्टल पर आवेदन से भुगतान तक
अब संस्थाओं को अनुदान के लिए आवेदन, जरूरी दस्तावेज अपलोड करने, प्रस्ताव के परीक्षण और स्वीकृति जैसी प्रक्रियाओं के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध रहेगा।
अनुदान स्वीकृत होने के बाद भुगतान और प्रगति की मॉनिटरिंग भी इसी व्यवस्था से की जा सकेगी। इससे मैनुअल प्रक्रिया पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
हर प्रस्ताव की स्थिति ऑनलाइन पता चलेगी
पोर्टल की मदद से विभागीय स्तर पर यह देखना आसान होगा कि किसी संस्था का प्रस्ताव किस चरण में पहुंचा है। डिजिटल ट्रैकिंग से प्रस्तावों की निगरानी अधिक व्यवस्थित तरीके से की जा सकेगी।
संस्थाओं के लिए भी दस्तावेज और प्रस्ताव लेकर बार-बार विभागीय कार्यालय जाने की जरूरत कम होगी। ऑनलाइन रिकॉर्ड उपलब्ध रहने से दस्तावेजों के संधारण में भी सुविधा होगी।
डेटा से योजनाओं की समीक्षा होगी आसान
नई व्यवस्था में अनुदान से संबंधित जानकारी डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेगी। इससे विभाग योजनाओं की प्रगति का आकलन करने के साथ जरूरत के अनुसार निर्णय ले सकेगा।
कागजी कार्यवाही कम होने से प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की उम्मीद है। भुगतान में लगने वाले समय को भी कम करने में डिजिटल प्रक्रिया मददगार होगी।
13 जिलों में 14 शक्ति सदन संचालित
मिशन शक्ति के तहत मध्यप्रदेश के 13 जिलों में 14 शक्ति सदन चल रहे हैं। इनमें कठिन परिस्थितियों में जीवन गुजार रही महिलाओं के साथ निराश्रित, जेल से रिहा महिला कैदी, प्राकृतिक आपदा से प्रभावित और हिंसा से पीड़ित महिलाओं को आश्रय एवं पुनर्वास की सुविधा दी जाती है।
इन केंद्रों में महिलाओं को कई जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, जिनमें:
- आश्रय और पोषण
- वस्त्र की सुविधा
- स्वास्थ्य सेवाएं
- कानूनी सलाह एवं सहायता
- पुनर्वास से जुड़ी सेवाएं
शक्ति सदनों से पिछले वर्ष 2,386 महिलाओं को लाभ मिला।
इन जिलों में हैं शक्ति सदन
भोपाल, उज्जैन, नर्मदापुरम, जबलपुर, बालाघाट, खंडवा, ग्वालियर, बैतूल, मंडला, मुरैना, राजगढ़, पांढुर्णा और छतरपुर में शक्ति सदन संचालित हैं।
130 बाल देखरेख संस्थाओं में 2,377 बच्चे
मिशन वात्सल्य के अंतर्गत किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार प्रदेश में 130 बाल देखरेख संस्थाएं संचालित हैं। इन संस्थाओं में वर्तमान में 2,377 बच्चे रह रहे हैं।
इनमें शामिल हैं:
- 62 बाल गृह
- 12 खुला आश्रय गृह
- 35 विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण अभिकरण
- 18 सम्प्रेक्षण गृह
- 3 विशेष गृह
इन संस्थाओं का उद्देश्य देखरेख और संरक्षण की जरूरत वाले बच्चों के साथ विधि का उल्लंघन करने वाले बच्चों को संरक्षण उपलब्ध कराना है। उनके पारिवारिक पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है।
79 अशासकीय संस्थाओं को मिल रहा अनुदान
मिशन वात्सल्य के तहत वर्तमान में 79 अशासकीय बाल देखरेख संस्थाओं को अनुदान दिया जा रहा है।
इनमें 44 बाल गृह, 9 खुला आश्रय गृह और 26 विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण अभिकरण शामिल हैं। नई ऑनलाइन व्यवस्था इन संस्थाओं से संबंधित अनुदान प्रक्रिया को भी डिजिटल ट्रैकिंग से जोड़ेगी।
16 सितंबर को भोपाल में तकनीकी प्रशिक्षण
ई-पोर्टल के इस्तेमाल और रिपोर्टिंग व्यवस्था को समझाने के लिए 16 सितंबर 2026 को भोपाल के होटल मैनेजमेंट एवं इंस्टीट्यूट में तकनीकी प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा।
शक्ति सदन और बाल देखरेख संस्थाओं से प्रबंधक एवं लेखापाल सहित दो-दो प्रतिभागी प्रशिक्षण में शामिल होंगे। उन्हें पोर्टल संचालन, ऑनलाइन आवेदन, दस्तावेज अपलोड करने और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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