
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने महिला सशक्तिकरण की सबसे बड़ी पहलों में शामिल 'शौर्या दल' को वर्ष 2030-31 तक जारी रखने का फैसला किया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब प्रदेशभर में सक्रिय यह नेटवर्क अगले 5 वर्षों तक महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा, जागरूकता और अधिकारों के लिए काम करता रहेगा।
6 जिलों से शुरू हुआ कारवां, आज पूरे प्रदेश में फैला
वर्ष 2013 में केवल 6 जिलों से शुरू हुई यह पहल आज मध्यप्रदेश के हर जिले तक पहुंच चुकी है। महिला एवं बाल विकास विभाग की इस योजना से वर्तमान में 22.52 लाख से अधिक महिलाएं और किशोरियां जुड़ी हुई हैं, जो सामाजिक बदलाव की मजबूत कड़ी बन चुकी हैं।
अपराध होने से पहले सक्रिय हो जाता है शौर्या दल
शौर्या दल की सबसे बड़ी खासियत इसकी रोकथाम आधारित कार्यप्रणाली है। घरेलू हिंसा, बाल विवाह, मानव तस्करी और महिलाओं से जुड़े अन्य मामलों की जानकारी मिलते ही दल की सदस्य स्थानीय स्तर पर सक्रिय होकर समझाइश और सामुदायिक सहयोग के जरिए हालात संभालने का प्रयास करती हैं। जरूरत पड़ने पर संबंधित विभागों और पुलिस को भी सूचना दी जाती है।
22 लाख महिलाओं का सबसे बड़ा सामाजिक नेटवर्क
शौर्या दल में 7.64 लाख छात्राएं और युवा महिलाएं तथा 14.88 लाख गृहणियां और अनुभवी महिलाएं शामिल हैं। नई पीढ़ी की ऊर्जा और वरिष्ठ महिलाओं के अनुभव का यह समन्वय गांव से लेकर शहर तक सामाजिक जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
सुरक्षा से आगे, अधिकारों तक पहुंच बनाने का माध्यम
यह पहल अब केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है। शौर्या दल की सदस्य महिलाओं को स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के साथ उनके अधिकारों के प्रति भी जागरूक करती हैं। इससे महिलाएं आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
मध्यप्रदेश का मॉडल बना मिसाल
सरकार का मानना है कि शौर्या दल ने महिला सशक्तिकरण को जमीनी स्तर पर नई पहचान दी है। समाज में जागरूकता बढ़ाने और महिलाओं की भागीदारी मजबूत करने वाला यह मॉडल अब देश के लिए भी एक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
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