
रिपोर्ट: अतुल जैन
शिवपुरी के सिरसौद गांव के 75 वर्षीय किसान सट्टूलाल ने सिंचाई बिल के निराकरण के लिए 2022 से 2026 तक 61 आवेदन दिए।
महुअर सिंचाई विभाग ने 29,136 रुपए के बिल को घटाकर 11,720 रुपए किया, लेकिन किसान के मुताबिक शिकायत के दौरान 18,300 रुपए खर्च हो गए।
चार साल में 61 बार लगाई गुहार
करैरा तहसील के सिरसौद गांव निवासी किसान सट्टूलाल पुत्र नंदकिशोर का मामला सरकारी शिकायत व्यवस्था में लंबे इंतजार का उदाहरण बनकर सामने आया है। किसान के अनुसार उन्होंने 2022 से 2026 के बीच करैरा और शिवपुरी की जनसुनवाई समेत अलग-अलग स्तरों पर कुल 61 लिखित आवेदन दिए।
इन आवेदनों और शिकायतों के लिए अधिकारियों के कार्यालयों तथा जनसुनवाई तक आने-जाने में किसान के मुताबिक करीब 18,300 रुपए खर्च हुए। 75 साल की उम्र में वह लगातार अपनी शिकायत के समाधान के लिए प्रयास करते रहे।
29,136 रुपए का बिल बना विवाद की वजह
मामले की शुरुआत वर्ष 2022 में हुई, जब महुअर सिंचाई विभाग की ओर से सट्टूलाल को 29,136 रुपए के सिंचाई बिल का नोटिस जारी किया गया। किसान ने इस राशि को गलत बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई।
सट्टूलाल का आरोप है कि नोटिस विभाग के पास करीब एक साल तक रहा और उसे वर्ष 2023 में दिया गया। इसके बाद उन्होंने करैरा स्थित सिंचाई विभाग से लेकर शिवपुरी और जिला प्रशासन की जनसुनवाई तक शिकायतें प्रस्तुत कीं।
अब बिल में 17 हजार से ज्यादा की कमी
लगातार शिकायतों के बाद सिंचाई विभाग ने बिल की राशि कम कर दी। किसान को अब 29,136 रुपए के बजाय 11,720 रुपए जमा करने की बात कही गई है।
यानी विभाग की ओर से बिल में 17,416 रुपए की कमी की गई। लेकिन सट्टूलाल का सवाल है कि यदि बिल में इतनी बड़ी राशि घटाई जा सकती थी तो इसके लिए उन्हें चार साल और 61 आवेदन क्यों लगाने पड़े।
किसान का सवाल- मेरा खर्च कौन देगा?
सट्टूलाल का कहना है कि बिल की राशि कम होने से उन्हें कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन शिकायत के समाधान में लगा समय और पैसा उनके लिए बड़ा नुकसान है।
उन्होंने कहा, “अगर विभाग को पहले ही बिल की राशि घटानी थी तो चार साल तक मुझे परेशान क्यों होना पड़ा। पहले ही राहत मिल जाती तो मेरे 18,300 रुपए खर्च नहीं होते।”
किसान के मुताबिक खर्च
शिकायतों के लिए कुल आवेदन: 61
शिकायत की अवधि: 2022 से 2026
आवागमन और आवेदन संबंधी खर्च: 18,300 रुपए
मूल सिंचाई बिल: 29,136 रुपए
संशोधित राशि: 11,720 रुपए
बिल में कमी: 17,416 रुपए
61 आवेदनों की फाइल लेकर मीडिया के पास पहुंचे
लगातार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने के बाद सट्टूलाल अपनी शिकायतों से जुड़ी पूरी फाइल लेकर मीडिया के पास पहुंचे। उन्होंने अपने द्वारा दिए गए 61 आवेदनों के दस्तावेज साथ रखे और पूरे मामले की जानकारी दी।
किसान के अनुसार उन्होंने समस्या के समाधान के लिए हर उपलब्ध स्तर पर आवेदन किया, लेकिन उन्हें बार-बार शिकायत प्रस्तुत करनी पड़ी। अब वह चाहते हैं कि उनकी शिकायत के पीछे की पूरी प्रक्रिया की जांच हो।
कलेक्टर से जांच और कार्रवाई की मांग
सट्टूलाल ने शिवपुरी कलेक्टर और संबंधित अधिकारियों से मामले की जांच कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि यदि 29,136 रुपए का बिल गलत तरीके से या किसी षडयंत्र के तहत जारी किया गया था, तो इसकी वास्तविकता सामने आनी चाहिए।
उन्होंने बिल तैयार किए जाने की प्रक्रिया, विभागीय रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने की मांग रखी है। किसान का कहना है कि जांच में यदि कोई जिम्मेदार पाया जाता है तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए।
चार साल बाद भी किसान को चाहिए पूरा जवाब
बिल की राशि घटने के बावजूद सट्टूलाल इस कार्रवाई को पूरी राहत नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि चार साल तक शिकायतें देने के बाद भी मूल सवाल का जवाब स्पष्ट नहीं हुआ है कि उनके नाम पर 29,136 रुपए का बिल आखिर किस आधार पर बनाया गया था।
अब किसान प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करने की मांग कर रहा है कि बिल जारी करने में क्या प्रक्रिया अपनाई गई और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी थी।
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

