
खनियांधाना। मध्यप्रदेश सरकार की मुफ्त राशन योजना गरीबों के लिए वरदान तो बनी, लेकिन शिवपुरी जिले खनियांधाना तहसील के गताझलकुई गांव में यह 'अभिशाप' बन गई है। यहां पिछले चार महीनों से सैकड़ों परिवारों को अनाज का एक दाना तक नसीब नहीं हुआ है। भूख से बिलबिलाए ग्रामीणों का गुस्सा सोमवार को फूट पड़ा और उन्होंने सरकारी राशन दुकान पर जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
अंगूठा लगवा लिया, राशन कहां है
ग्रामीणों का आरोप है कि सेल्समैन हर महीने राशन कार्डधारकों का फिंगरप्रिंट तो लगवा लेता है, लेकिन अनाज देने की बारी आते ही उन्हें खाली हाथ लौटा देता है। गांव के बुजुर्गों और महिलाओं ने बताया कि ऑनलाइन रिकॉर्ड में राशन चढ़ जाता है, मगर भौतिक रूप से एक किलो अनाज भी नहीं मिलता। विरोध करने पर सेल्समैन अभद्र व्यवहार करता है और धमकाता है कि "जाओ, जहां शिकायत करनी है कर लो।"
200-300 परिवार संकट में, तपती धूप में खड़े रहने को मजबूर
गताझलकुई के करीब 200 से 300 पात्र परिवार इसी समस्या से जूझ रहे हैं। सोमवार को भारी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे तपती धूप में राशन दुकान के बाहर अपने हक के लिए खड़े रहे। ग्रामीणों ने बताया कि कुछ चुनिंदा लोगों को ही राशन दिया जा रहा है, जबकि बड़ी संख्या में गरीब परिवारों को वंचित रखा जा रहा है। राशन दुकान के सामने जुटी भीड़ इस बात का सबूत है कि समस्या एक-दो घर की नहीं, पूरे गांव की है।
नायब तहसीलदार पहुंचे मौके पर, ग्रामीणों ने लगाई गुहार
हंगामे की सूचना पर नायब तहसीलदार रामनरेश आर्य मौके पर पहुंचे। आक्रोशित ग्रामीणों ने उन्हें घेर लिया और दोषी सेल्समैन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों ने मांग रखी कि पिछले चार महीनों का बकाया राशन तुरंत वितरित किया जाए और राशन वितरण प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि गरीबों का हक उन्हें मिल सके।
अब प्रशासन पर नजर
जमीनी स्तर पर योजना के क्रियान्वयन में सामने आ रही इस गंभीर अनियमितता के बाद अब सबकी नजर जिला प्रशासन और खाद्य विभाग पर टिकी है। देखना होगा कि दोषी सेल्समैन पर कार्रवाई होती है या नहीं, और भूख से जूझ रहे इन 300 परिवारों को उनका हक कब तक मिल पाता है। या फिर सरकारी फाइलों में 'राशन बंट गया' और गरीब के घर में 'चूल्हा ठंडा' ही रहेगा।
इनका कहना है
आदिवासी भाइयों को पिछले कई महीनों से राशन नहीं मिल रहा है। किसी को दो महीने, किसी को चार, तो किसी को छह महीने से राशन से वंचित रखा गया है। जब ग्रामीणों ने मुझे बुलाया और मैंने सेल्समैन से इस संबंध में बात की, तो वह लड़ने-झगड़ने पर उतारू हो गया। वह अपनी नेतागिरी दिखाता है और कहता है कि जो करना है कर लो। राशन की पर्ची होने के बावजूद गरीबों को अनाज नहीं दिया जा रहा है। हमने इस मामले में सरपंच को भी अवगत कराया है और प्रशासन से मांग करते हैं कि इन आदिवासियों को उनका हक दिलाया जाए।"
- रामकृष्ण यादव, ग्रामीण
“मैं मौके पर गया था और दुकान का निरीक्षण किया। मई और जून माह का राशन दुकान पर उपलब्ध मिला है। कुछ हितग्राही मजदूरी के लिए बाहर गए थे, इसलिए उनका राशन बचा हुआ है। ग्रामीणों ने दुकान की दूरी और मशीन संबंधी समस्या बताई थी। सरपंच को नई उचित मूल्य दुकान की व्यवस्था सुधारने और सुरक्षा के निर्देश दिए गए हैं। मशीन चालू होते ही सभी हितग्राहियों को नियमित राशन वितरण किया जाएगा। बाहर गए मजदूरों को लौटने पर उनका राशन भी दिया जाएगा। अब ऐसी समस्या नहीं आने दी जाएगी।”
- रामनरेश आर्य, नायब तहसीलदार खनियाधाना
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