
अतुल जैन
शिवपुरी। मध्यप्रदेश के शिवपुरी में जमीन रजिस्ट्री के नाम पर एक अनपढ़ महिला से बड़ा खेल हो गया। रजिस्ट्री खर्च के नाम पर 87 हजार रुपये वसूले गए, जबकि असली खर्च आधे से भी कम निकला—अब मामला खुलने के बाद कार्रवाई तो हुई, लेकिन सवाल अभी बाकी हैं।
46 हजार का खर्च, वसूले 87 हजार
शिवपुरी जिले के पिछोर तहसील के एक गांव की महिला ने जमीन खरीदी थी। रजिस्ट्री दस्तावेज में कुल खर्च ₹45,890 दर्ज है, लेकिन सेवा प्रदाता के सहयोगी ने उससे ₹87,000 ले लिए। यानी साफ तौर पर ₹41,110 की ठगी की गई—और यह पूरा खेल महिला के अनपढ़ होने का फायदा उठाकर किया गया।
कैसे हुआ पूरा मामला?
पीड़िता ने गांव में जमीन का छोटा हिस्सा खरीदा था और रजिस्ट्री के लिए स्थानीय कंप्यूटर सेंटर पहुंची। वहां अधिकृत सेवा प्रदाता की जगह उसका रिश्तेदार काम कर रहा था, जिसने पूरे प्रोसेस को संभाला और ज्यादा पैसे वसूल लिए। महिला को असली खर्च की जानकारी नहीं थी, इसी का फायदा उठाकर रकम दोगुनी से ज्यादा ली गई—यहीं से मामला गंभीर बन गया।
शिकायत के बाद एक्शन, लायसेंस रद्द
मामले की शिकायत पुलिस, कलेक्टर और जिला पंजीयक से की गई। जांच में सामने आया कि लाइसेंस जिस व्यक्ति के नाम था, वह खुद काम नहीं कर रहा था—यह नियमों का उल्लंघन है। इसके बाद जिला रजिस्ट्रार दुष्यंत दीक्षित ने सेवा प्रदाता का लाइसेंस निरस्त कर दिया—लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।
पैसा नहीं लौटाया, FIR भी नहीं
सबसे बड़ा सवाल यही है कि कार्रवाई के बावजूद पीड़ित को अभी तक पैसा वापस नहीं मिला है। साथ ही, आरोपियों के खिलाफ आपराधिक केस भी दर्ज नहीं हुआ है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि सिर्फ लाइसेंस रद्द करना काफी नहीं है—जब तक पैसा वापस और FIR नहीं होगी, न्याय अधूरा रहेगा।
जिला रजिस्ट्रार का कहना है कि जांच में अनियमितता साफ पाई गई, इसलिए लाइसेंस रद्द किया गया। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पैसा वापस करवाना या FIR दर्ज कराना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता—यानी आगे की कार्रवाई अब पुलिस पर निर्भर है।
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