
रिपोर्ट : अतुल जैन
शिवपुरी में 5 अगस्त को सहरिया क्रांति स्थापना दिवस को अधिकार दिवस के रूप में मनाते हुए सहरिया आदिवासी बड़ी संख्या में जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे। मुख्यमंत्री के नाम तैयार 60 सूत्रीय ज्ञापन कलेक्टर अर्पित वर्मा को सौंपा गया, जिसमें राशन, जमीन, वनाधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और महिलाओं की सुरक्षा सहित कई मुद्दे उठाए गए।
कलेक्टर ने प्रतिनिधिमंडल की समस्याएं विस्तार से सुनीं और कई मामलों में संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इससे संतुष्ट आदिवासी प्रतिनिधियों ने कलेक्ट्रेट परिसर में "जिला प्रशासन जिंदाबाद" और "कलेक्टर साहब जिंदाबाद" के नारे लगाए।
राष्ट्रभक्ति गीतों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे आदिवासी
सहरिया आदिवासी सदस्य डीजे पर बज रहे देशभक्ति गीतों की धुन पर नाचते-गाते जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे। हाथों में तख्तियां लेकर महिला और पुरुष अपने अधिकारों की मांग करते हुए शांतिपूर्ण रैली में शामिल हुए।
मुख्यमंत्री के नाम सौंपा 60 सूत्रीय ज्ञापन
सहरिया क्रांति के संयोजक संजय बेचैन के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इस दौरान औतार भाई सहरिया, मोहरसिंह आदिवासी, अजय आदिवासी, अनिल आदिवासी, आशाराम आदिवासी, नीलेश आदिवासी, सुनील आदिवासी, पंजाब आदिवासी और ऊधम आदिवासी सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे।
कलेक्टर अर्पित वर्मा ने दिए तत्काल निर्देश
ज्ञापन लेने के बाद कलेक्टर अर्पित वर्मा ने प्रतिनिधियों से व्यक्तिगत और सामुदायिक समस्याओं की जानकारी ली। कई मामलों में संबंधित अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए गए, जबकि कुछ समस्याओं का मौके पर ही समाधान कराया गया।
आंदोलन को बताया सामाजिक अभियान
प्रतिनिधियों ने कहा कि सहरिया क्रांति किसी राजनीतिक दल या चुनाव से जुड़ा मंच नहीं है। इसका उद्देश्य संविधान और सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाले अधिकारों को सहरिया समाज तक पहुंचाना तथा शोषण, दमन और अन्याय के खिलाफ शांतिपूर्ण संघर्ष करना है।
ज्ञापन में उठाई गई प्रमुख मांगें
राशन व्यवस्था
बायोमेट्रिक विफल होने पर वैकल्पिक सत्यापन से राशन।
कालाबाजारी और कम तौल के खिलाफ अभियान।
कटे हुए नाम जोड़ने के लिए गांवों में शिविर।
लंबित पोषण अनुदान का भुगतान।
भूमि और वनाधिकार
आदिवासी भूमि की अवैध बिक्री रोकने की मांग।
संदिग्ध विक्रय अनुमतियों की समीक्षा।
दबंगों से जमीन मुक्त कराने की कार्रवाई।
लंबित वनाधिकार दावों की पुनः सुनवाई।
सामुदायिक वनाधिकार की मान्यता।
वन उपज का उचित मूल्य और वन्यजीवों से नुकसान पर शीघ्र मुआवजा।
आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य
हर सहरिया बस्ती तक सड़क, बिजली, पेयजल और पक्का आवास।
अधूरे आवासों की रुकी किस्त जारी करना।
मोबाइल मेडिकल यूनिट, डॉक्टर और दवाओं की उपलब्धता।
टीबी, एनीमिया और सिकल सेल की जांच।
शिक्षकविहीन स्कूलों में नियुक्तियां।
छात्रवृत्ति, गणवेश, पुस्तक और साइकिल समय पर उपलब्ध कराना।
रोजगार और सामाजिक सुरक्षा
मांगते ही मनरेगा में काम और समय पर मजदूरी।
फर्जी हाजिरी पर कार्रवाई।
बंधुआ मजदूरी और पलायन रोकने के उपाय।
कौशल प्रशिक्षण और स्थानीय रोजगार।
महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर तत्काल एफआईआर।
वृद्ध, विधवा और दिव्यांग पेंशन का नियमित भुगतान।
प्रशासनिक सुधार की भी मांग
ज्ञापन में मुख्यमंत्री कार्यालय के अधीन राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी नियुक्त करने तथा शिवपुरी में कलेक्टर की अध्यक्षता में सहरिया समस्या निवारण प्रकोष्ठ बनाने का प्रस्ताव रखा गया। साथ ही प्रत्येक मांग पर 30 दिन में प्रारंभिक कार्रवाई, 60 दिन में जिला स्तरीय समीक्षा और 90 दिन में सार्वजनिक प्रगति रिपोर्ट जारी करने की मांग की गई।
समाज ने जताई उम्मीद
सहरिया प्रतिनिधियों का कहना है कि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ कागजों पर नहीं बल्कि जमीन पर चाहिए। उनका मानना है कि कलेक्ट्रेट में हुई संवेदनशील सुनवाई से उम्मीद जगी है और अब नजर इस बात पर है कि 60 सूत्रीय ज्ञापन की मांगों पर आगे क्या कार्रवाई होती है।
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