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जब पीएम मोदी ने कहा, ‘मैं मुख्यमंत्री नहीं, अपने शिवराज से बात कर रहा हूं’, पढ़िए शिवराज की किताब के प्रधानमंत्री के 10 बड़े किस्से

27 मई, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
जब पीएम मोदी ने कहा, ‘मैं मुख्यमंत्री नहीं, अपने शिवराज से बात कर रहा हूं’, पढ़िए शिवराज की किताब के प्रधानमंत्री के 10 बड़े किस्से
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने करीब 35 साल के राजनीतिक और व्यक्तिगत अनुभवों को किताब के रूप में साझा किया है। ‘अपनापन : नरेंद्र मोदी संग मेरे अनुभव’ नाम की इस किताब का विमोचन मंगलवार को दिल्ली में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा और पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने किया। किताब में कई ऐसे प्रसंग हैं, जो राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गए हैं।


2023 चुनाव में जब मोदी का आया फोन

किताब में शिवराज सिंह चौहान ने 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव का एक भावुक प्रसंग साझा किया है। भाजपा की पहली सूची में नाम नहीं आने और विपक्ष के हमलों के बीच राजनीतिक माहौल बेहद तनावपूर्ण बताया गया है। शिवराज लिखते हैं कि उसी दौरान प्रधानमंत्री मोदी का फोन आया। उन्होंने कहा- “मैं मुख्यमंत्री से नहीं, अपने शिवराज से बात कर रहा हूं।” किताब के मुताबिक, मोदी ने उन्हें राजनीति छोड़ मन को शांत रखने की सलाह दी। इसके बाद शिवराज उत्तराखंड गए और आत्ममंथन के बाद दोबारा पूरे जोश से चुनाव प्रचार में लौटे। दावा है कि उन्होंने 13-14 दिनों में 165 से ज्यादा सभाएं कीं।


पहलगाम हमले के बाद मोदी का शांत संदेश

किताब की शुरुआत अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले के जिक्र से होती है, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी। शिवराज के अनुसार, हमले के बाद हुई कैबिनेट बैठक में पूरा माहौल तनावपूर्ण था। उन्होंने लिखा है कि प्रधानमंत्री मोदी बेहद शांत दिखाई दे रहे थे। उसी बैठक में उन्होंने कहा था— “इस बार का ऑपरेशन अलग होगा… आतंकियों और उनके आकाओं को नहीं छोड़ेंगे।” शिवराज ने इसे संकट के समय संयमित नेतृत्व की मिसाल बताया है।


जब राजनीति में ई-मेल पर हुआ था मजाक

किताब में 1990 के दशक का एक दिलचस्प किस्सा भी शामिल है। उस समय राजनीति में कंप्यूटर और ई-मेल आम नहीं थे। शिवराज के मुताबिक, नरेंद्र मोदी तकनीक की ताकत को बहुत पहले समझ चुके थे। 1998 की एक बैठक में मोदी ने नेताओं से पूछा कि कितनों के पास ई-मेल आईडी है। इस पर वरिष्ठ नेता बाबूलाल गौर ने मजाकिया अंदाज में कहा— “ईमेल-फीमेल से क्या होगा?” हालांकि, शिवराज लिखते हैं कि वही तकनीक आज राजनीति और प्रशासन का सबसे बड़ा माध्यम बन चुकी है।


कोविड में अस्पताल में थे, तब आया PM का फोन

कोरोना काल का जिक्र करते हुए शिवराज ने बताया कि जब वे खुद कोविड संक्रमित होकर अस्पताल में भर्ती थे, तब प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें फोन किया। उन्होंने सिर्फ औपचारिक हालचाल नहीं पूछा, बल्कि ऑक्सीजन लेवल, दवाइयों और परिवार की सुरक्षा तक की जानकारी ली। शिवराज के मुताबिक, उस बातचीत में उन्हें प्रधानमंत्री से ज्यादा परिवार के बड़े सदस्य जैसा अपनापन महसूस हुआ।


पिता के निधन पर सबसे पहले आया था कॉल

शिवराज ने किताब में 2019 में अपने पिता के निधन का भी जिक्र किया है। उन्होंने लिखा कि सबसे पहला सांत्वना फोन प्रधानमंत्री मोदी का आया था। किताब के अनुसार, मोदी ने परिवार की स्थिति और अंतिम समय तक की जानकारी विस्तार से पूछी। शिवराज लिखते हैं कि राजनीति के व्यस्त जीवन में भी किसी नेता का इस तरह व्यक्तिगत दुख में साथ खड़ा होना उन्हें अंदर तक छू गया।


बेटों की शादी में रिश्तेदारों से मिलते रहे मोदी

किताब में 2025 में हुई उनके दोनों बेटों की शादी का भी जिक्र है। शिवराज के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने सिर्फ औपचारिक मुलाकात नहीं की, बल्कि करीब 40 मिनट तक परिवार के साथ बैठकर बातचीत की। उन्होंने डेयरी कारोबार, गायों की नस्ल और दूध उत्पादन तक के बारे में सवाल पूछे। शादी समारोह में भी वे रिश्तेदारों से मिलते और हालचाल लेते रहे।


निवेशकों के बीच रहने की सलाह

2014 की इंदौर ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का जिक्र करते हुए शिवराज लिखते हैं कि कार्यक्रम खत्म होने के बाद वे प्रोटोकॉल के तहत प्रधानमंत्री को एयरपोर्ट छोड़ने जा रहे थे। तभी मोदी ने उनका हाथ पकड़कर कहा— “आप डेलीगेट्स के बीच रहिए, प्रदेश को ज्यादा फायदा होगा।” शिवराज के मुताबिक, मोदी हमेशा औपचारिकता से ज्यादा परिणाम को महत्व देते हैं।


दो दशक बाद भी कार्यकर्ता को पहचान लिया

किताब में हरियाणा के झज्जर की एक रैली का किस्सा भी है। यहां प्रधानमंत्री मोदी ने करीब 20 साल बाद भाजपा के पुराने कार्यकर्ता दीपक कुमार को पहचान लिया। शिवराज के अनुसार, मोदी मंच से उतरकर उनके पास गए, गले लगाया और पुराने दिनों को याद किया। यह देखकर वहां मौजूद लोग हैरान रह गए।


किसानों पर समझौता नहीं: किताब में दावा

किताब में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से जुड़े टैरिफ विवाद का भी जिक्र है। शिवराज के मुताबिक, उस दौरान कैबिनेट बैठक में मोदी ने साफ कहा था कि किसानों, मछुआरों और पशुपालकों के हितों से समझौता नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ी तो राजनीतिक कीमत चुकाने के लिए भी तैयार हैं।


‘स्ट्रीटप्रेन्योर’ शब्द का जिक्र

पीएम स्वनिधि योजना पर लिखते हुए शिवराज ने कहा कि मोदी ने रेहड़ी-पटरी वालों को सिर्फ लाभार्थी नहीं, बल्कि “स्ट्रीटप्रेन्योर” के रूप में देखने की सोच दी। किताब के मुताबिक, कोविड काल में शुरू हुई इस योजना ने छोटे कारोबारियों को सिर्फ ऋण नहीं, बल्कि सम्मान भी दिलाया। मुख्यमंत्री निवास में आयोजित कार्यक्रमों में कई स्ट्रीट वेंडर्स पहली बार सम्मानित महसूस कर रहे थे।

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