
भोपाल। मध्यप्रदेश में शुक्रवार, 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर प्रदेशभर में बड़े स्तर पर सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। 55 जिलों के 111 स्थानों पर होने वाले इन आयोजनों में कृष्ण की लीलाओं, भक्ति और लोक परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी।
संस्कृति विभाग के श्रीकृष्ण पाथेय न्यास ने ‘घर-घर गोकुल, घर-घर गोपाल’ की थीम के साथ कार्यक्रमों की व्यापक रूपरेखा तैयार की है। 7500 से अधिक श्रीकृष्ण मंदिरों में विशेष सजावट होगी और 1500 से ज्यादा स्थानीय कलाकार प्रस्तुतियां देंगे।
101 से ज्यादा बच्चे बनेंगे राधा-कृष्ण
श्रीकृष्ण पर्व का प्रमुख कार्यक्रम मुख्यमंत्री निवास में रखा गया है। यहां 101 से अधिक बच्चे राधा-कृष्ण की वेशभूषा में शामिल होंगे। जन्मोत्सव के दौरान मटकी फोड़ कार्यक्रम भी होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बच्चों को माखन-मिश्री, लड्डू गोपाल की मूर्ति और बाल लीलाओं पर आधारित पुस्तक भेंट करेंगे।
कार्यक्रम समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री महू के जानापाव पहुंचेंगे। वहां परशुराम-श्रीकृष्ण लोक के भूमिपूजन का कार्यक्रम है।
जानापाव में भगवान परशुराम द्वारा श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र दिए जाने के प्रसंग पर नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। साथ ही श्रीकृष्ण और भगवान परशुराम से संबंधित प्रसंगों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।
111 स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम
प्रदेश में आयोजित कार्यक्रमों में अलग-अलग विधाओं को शामिल किया गया है। इनमें प्रमुख रूप से—
नृत्य-नाटिका
रासलीला
भजन और भक्ति गायन
लोकगायन
शास्त्रीय नृत्य
82 मंदिरों में विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियां प्रस्तावित हैं। मंच पर श्रीकृष्ण के जन्म, बाल लीलाओं, मित्रता, भक्ति और जीवन दर्शन से जुड़े प्रसंग प्रस्तुत किए जाएंगे।
भोपाल में इस्कॉन मंदिर में उमड़ेंगे श्रद्धालु
भोपाल के इस्कॉन पटेल नगर, हरे कृष्ण लैंड, रायसेन रोड पर शुक्रवार को जन्माष्टमी महोत्सव आयोजित होगा। आयोजकों ने यहां करीब एक लाख श्रद्धालुओं के आने की संभावना जताई है।
भगवान श्री श्री गौर राधा वल्लभ जी के विशेष दर्शन और श्रृंगार के लिए मंदिर को जैसलमेर की पारंपरिक थीम पर सजाया जा रहा है। सजावट में थाईलैंड से मंगाए गए विशेष ऑर्किड फूल लगाए जाएंगे।
कार्यक्रम में लगातार हरे कृष्ण महामंत्र का कीर्तन होगा। श्रीकृष्ण कथा के साथ ‘रुक्मिणी कल्याणम्’ नामक भक्तिमय नाट्य प्रस्तुति भी होगी। श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की व्यवस्था की गई है।
उज्जैन में कृष्ण-सुदामा से लेकर गीता उपदेश तक
उज्जैन के नारायणा धाम मंदिर परिसर में 2 से 6 सितंबर तक पांच दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम चल रहा है। प्रस्तुतियों में कृष्ण-सुदामा मित्रता, गुरु सांदीपनि आश्रम, माखन चोरी, जन्म एवं बाल लीला और गीता उपदेश जैसे प्रसंग शामिल हैं।
भरतनाट्यम, कथक, ओडिसी, भजन और रासलीला के माध्यम से कृष्ण चरित्र के अलग-अलग पहलुओं को मंच पर दिखाया जाएगा।
उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में 2 से 4 सितंबर तक गुरु-शिष्य परंपरा पर आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। नृत्य-नाटिका में श्रीकृष्ण के महर्षि सांदीपनि से शिक्षा लेने तथा 64 कलाओं और 14 विद्याओं का ज्ञान प्राप्त करने की परंपरा प्रस्तुत होगी।
पन्ना से महिदपुर तक अलग-अलग कृष्ण प्रसंग
पन्ना के श्री बलदेवजी मंदिर में बलदेव-श्रीकृष्ण प्रसंग पर नृत्य-नाटिका और भजन होंगे। श्री जुगल किशोर मंदिर में कृष्ण नृत्य-नाटिका, भक्ति गायन और प्रणामी परंपरा पर आधारित भरतनाट्यम होगा।
धार के अमझेरा में 3 और 4 सितंबर को श्रीकृष्ण लीला तथा रुक्मिणी वरण एवं विवाह पर केंद्रित नृत्य-नाटिकाएं आयोजित होंगी।
महिदपुर में राधा-कृष्ण प्रेम, भक्ति गायन, बुंदेली लोकगायन और श्रीकृष्ण जन्म से जुड़े कार्यक्रम रखे गए हैं।
कई जिलों में 4 सितंबर की शाम विशेष आयोजन
पाली, शहडोल, मंडला, दमोह, रीवा और खातेगांव सहित कई स्थानों पर एक दिवसीय कार्यक्रम होंगे। मथुरा प्रवेश, गोवर्धन धारण, सुदामा मिलन और कालियानाग मानमर्दन जैसे प्रसंग प्रस्तुत किए जाएंगे।
ग्वालियर, रायसेन, गुना, छतरपुर, शिवपुरी, झाबुआ, नीमच, मंदसौर, मुरैना, राजगढ़ और इंदौर समेत कई जिलों में 4 सितंबर की शाम कृष्ण केंद्रित सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
स्थानीय कलाकारों को भी मिला मंच
श्रीकृष्ण पर्व में प्रदेश के अलग-अलग अंचलों से स्थानीय कलाकारों को बड़ी संख्या में जोड़ा गया है। खरगौन, बड़वानी, खंडवा, राजगढ़, बैतूल, सीहोर, भोपाल, मंदसौर, रतलाम, उज्जैन, नीमच, रायसेन और सागर के कलाकार इसमें शामिल होंगे।
इसके अलावा सतना, रीवा, सिंगरौली, सीधी, कटनी, छिंदवाड़ा, धार, देवास, नरसिंहपुर, उमरिया, बालाघाट, शहडोल, अनूपपुर, मंडला, डिंडोरी, बुरहानपुर, निवाड़ी और टीकमगढ़ समेत कई जिलों के कलाकार भी प्रस्तुतियां देंगे।
नई पीढ़ी को कृष्ण विरासत से जोड़ने पर जोर
संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र सिंह लोधी के मुताबिक भगवान श्रीकृष्ण भारतीय संस्कृति, जीवन-दर्शन और मानवीय मूल्यों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रतीक हैं। उनके अनुसार मध्यप्रदेश का भी श्रीकृष्ण से ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक जुड़ाव रहा है।
मंत्री ने कहा कि श्रीकृष्ण पर्व के जरिए नई पीढ़ी को प्रदेश की कृष्ण परंपरा और उनसे जुड़े जीवन मूल्यों से परिचित कराने का प्रयास किया जा रहा है।
श्रीकृष्ण पाथेय न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्रीराम तिवारी ने बताया कि इस बार आयोजन के दायरे को बढ़ाया गया है। सांदीपनि आश्रम, नारायणा धाम, अमझेरा, जानापाव और जामगढ़ जैसे ऐतिहासिक-पौराणिक स्थलों के साथ विभिन्न क्षेत्रों के धार्मिक केंद्र भी कार्यक्रमों में शामिल किए गए हैं।
उनके अनुसार आयोजन का उद्देश्य केवल कृष्ण से जुड़े प्रसंगों को प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि स्थानीय लोककला और सांस्कृतिक परंपराओं को भी व्यापक मंच उपलब्ध कराना है।
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