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सिंहस्थ 2028 में रोजाना 13 हजार टन सब्जियों की जरूरत का अनुमान, उज्जैन के लिए कैसे तैयार होगा सप्लाई नेटवर्क?

23 अक्टू, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
सिंहस्थ 2028 में रोजाना 13 हजार टन सब्जियों की जरूरत का अनुमान, उज्जैन के लिए कैसे तैयार होगा सप्लाई नेटवर्क?
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के दौरान करीब 40 करोड़ श्रद्धालुओं के संभावित आगमन को देखते हुए मध्य प्रदेश के उद्यानिकी विभाग ने सब्जियों और फूलों की उपलब्धता बढ़ाने की योजना तैयार की है। इसके तहत 15 जिलों में 16 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त जमीन पर उत्पादन विकसित करने और लगभग 20 हजार किसानों को इस अभियान से जोड़ने का प्रस्ताव है।


योजना में सब्जियों और फूलों के लिए अलग-अलग उत्पादन क्षेत्र बनाए जाएंगे। लक्ष्य केवल फसल उगाना नहीं, बल्कि कटाई से लेकर संग्रहण, पैकिंग और उज्जैन तक नियमित आपूर्ति की व्यवस्था तैयार करना भी है।


60 दिन में 8 लाख टन सब्जियों की जरूरत का अनुमान

सिंहस्थ के दौरान भोजन की संभावित मांग का आकलन करते हुए 60 दिनों में करीब 8 लाख टन सब्जियों की आवश्यकता का अनुमान लगाया गया है। गणना के लिए प्रतिदिन औसतन 66.67 लाख श्रद्धालुओं की आवाजाही और प्रति व्यक्ति रोजाना 2 किलो सब्जी की जरूरत का मानक लिया गया है।


इस हिसाब से प्रतिदिन लगभग 13.33 हजार टन सब्जियों की मांग बनती है। यह अनुमानित आंकड़ा है। वास्तविक खपत श्रद्धालुओं के ठहरने, भोजन की उपलब्धता और सब्जियों के इस्तेमाल पर निर्भर करेगी।


सब्जी और फूल उत्पादन के लिए अलग-अलग लक्ष्य

उद्यानिकी विभाग की प्रस्तावित योजना में कुल 16 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र को दो हिस्सों में बांटा गया है। सब्जियों के लिए 8 हजार हेक्टेयर और फूलों की खेती के लिए इतने ही क्षेत्र में उत्पादन विकसित करने की तैयारी है।


योजना के तहत किसानों और उत्पादन क्लस्टर की पहचान करके फसलवार लक्ष्य तय किए जाएंगे। इसके बाद उपज का संग्रहण, ग्रेडिंग, पैकिंग और परिवहन किया जाएगा, ताकि आयोजन के दौरान उज्जैन में मांग के अनुरूप सामग्री पहुंचाई जा सके।


सात जिलों में बढ़ेगा हाइब्रिड सब्जियों का उत्पादन

सब्जियों की अतिरिक्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उज्जैन संभाग के सात जिलों को प्रस्तावित नेटवर्क में शामिल किया गया है। अगले दो वर्षों में यहां कुल 8 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में उत्पादन विकसित करने की योजना है।


इन जिलों में उज्जैन, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, रतलाम, नीमच और मंदसौर शामिल हैं। किसानों को फसल चयन और आधुनिक खेती की तकनीकों का प्रशिक्षण देने की तैयारी भी की जा रही है।


आठ जिलों में फूलों की खेती के लिए 8 हजार हेक्टेयर का प्रस्ताव

सिंहस्थ में मंदिरों, अखाड़ों, आश्रमों, धार्मिक शिविरों और श्रद्धालुओं की पूजा के लिए फूलों की मांग बढ़ने की संभावना है। इसे ध्यान में रखते हुए आठ जिलों में फूल उत्पादन का दायरा बढ़ाने की योजना बनाई गई है।


प्रस्तावित जिलों में उज्जैन, इंदौर, देवास, आगर-मालवा, खंडवा, छतरपुर, मैहर और दतिया शामिल हैं। अगले दो वर्षों में इन क्षेत्रों में कुल 8 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त जमीन पर फूलों की खेती विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।


उज्जैन में 4,200 हेक्टेयर में गेंदा उगाने की तैयारी

फूलों की स्थानीय जरूरत पूरी करने के लिए उज्जैन में गेंदा उत्पादन बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रस्ताव के अनुसार, 4,200 हेक्टेयर में खेती विकसित करने के लिए 25 क्लस्टर बनाए जाएंगे और 240 गांवों को इस योजना से जोड़ने की तैयारी है।


गुलाब की खेती का क्षेत्र भी बढ़ाकर 250 हेक्टेयर से अधिक करने का प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त उज्जैन में करीब 19 एकड़ जमीन पर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर फ्लोरीकल्चर विकसित करने की योजना है।


इस केंद्र के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर पौध सामग्री और खेती संबंधी प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा। स्थानीय उत्पादन पर्याप्त नहीं होने पर दूसरे शहरों और राज्यों से फूल मंगाने पड़ सकते हैं, जिससे परिवहन खर्च और कीमतें बढ़ सकती हैं।


फसल खराब होने पर दूसरे जिलों से पहुंचेगी उपज

लंबे आयोजन के दौरान मौसम, कीट और फसल संबंधी बीमारियां उत्पादन को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए अलग-अलग जिलों को वैकल्पिक आपूर्ति केंद्र के रूप में तैयार करने की जरूरत होगी।


उदाहरण के तौर पर, किसी क्षेत्र में टमाटर की फसल खराब होने पर दूसरे जिले से इसकी आपूर्ति बढ़ाई जा सकती है। आलू, प्याज और हरी सब्जियों के लिए भी विभिन्न उत्पादन क्षेत्रों के बीच तालमेल रखने की योजना है।


फसलवार उत्पादन का पूर्वानुमान और नियमित निगरानी इस व्यवस्था का अहम हिस्सा होंगे। इससे किसी एक जिले में उत्पादन घटने पर दूसरे क्षेत्रों से आपूर्ति बढ़ाने का विकल्प मिल सकेगा।


खेत से मेला क्षेत्र तक उपज पहुंचाना बड़ी चुनौती

सब्जियां जल्दी खराब होने वाली फसलें हैं। इसलिए उत्पादन बढ़ाने के साथ कटाई के बाद उपज को सुरक्षित रखने और समय पर उज्जैन पहुंचाने की व्यवस्था बनाना भी जरूरी होगा।


इसके लिए उत्पादन क्षेत्रों के पास संग्रहण केंद्र, ग्रेडिंग और पैकिंग की सुविधाएं विकसित करने की आवश्यकता होगी। जरूरत के मुताबिक कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था और तेज परिवहन भी अहम रहेंगे।


दैनिक मांग और उपलब्ध उपज का डिजिटल रिकॉर्ड रखने से यह तय करने में मदद मिल सकती है कि किस जिले से कितनी मात्रा भेजनी है। उत्पादन और परिवहन में तालमेल की कमी रहने पर पर्याप्त फसल होने के बावजूद आयोजन स्थल पर सब्जियों की कमी हो सकती है।


दो साल पहले से किसानों को प्रशिक्षण देने की तैयारी

उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक केएस मंडलाई के अनुसार, सिंहस्थ में सब्जियों और फूलों की संभावित मांग को ध्यान में रखते हुए दो साल की योजना बनाई गई है। मांग का आकलन करके उत्पादन की तैयारी पहले से शुरू करने पर जोर दिया जा रहा है।


मंडलाई के मुताबिक, किसानों की पहचान कर उन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे आयोजन के समय जरूरत के अनुरूप उत्पादन किया जा सके। इसके लिए विशेष क्लस्टर विकसित करने और खेती में किसानों को सहायता देने की योजना भी शामिल है।


सिंहस्थ की तैयारी में कृषि आपूर्ति नेटवर्क की अहम भूमिका

15 जिलों में प्रस्तावित उत्पादन नेटवर्क का उद्देश्य आयोजन के दौरान सब्जियों और फूलों की उपलब्धता बनाए रखना है। करीब 20 हजार किसानों को जोड़ने की योजना के साथ उत्पादन, प्रशिक्षण और आपूर्ति को एक व्यवस्था में लाने की तैयारी है।


इस योजना का प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि खेतों में तैयार होने वाली उपज का संग्रहण, भंडारण और परिवहन कितनी अच्छी तरह समन्वित हो पाता है।

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