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सिंगरौली में मां के चेहरे से 340 सिम एक्टिवेट, AI ने पकड़ा फर्जीवाड़ा, 850 सिम का बड़ा रैकेट उजागर

30 मार्च, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
सिंगरौली में मां के चेहरे से 340 सिम एक्टिवेट, AI ने पकड़ा फर्जीवाड़ा, 850 सिम का बड़ा रैकेट उजागर
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

मध्य प्रदेश के सिंगरौली में ऐसा साइबर फ्रॉड सामने आया है जिसने सबको चौंका दिया। एक ही महिला के चेहरे का इस्तेमाल कर सैकड़ों सिम कार्ड एक्टिवेट कर दिए गए। AI सिस्टम ने जब सच उजागर किया, तो पूरा रैकेट बेनकाब हो गया।


मां के चेहरे का इस्तेमाल, बेटे ने किया बड़ा खेल

जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी अनिल कुमार रवानी ने अपनी ही मां के चेहरे का इस्तेमाल कर फर्जीवाड़ा किया। वह अपनी मां को अलग-अलग एंगल से कैमरे के सामने खड़ा करता और चेहरे के हाव-भाव बदलवाकर सिस्टम को भ्रमित करता। इस तरीके से उसने करीब 340 सिम कार्ड सिर्फ एक ही चेहरे से एक्टिवेट कर दिए—जो चौंकाने वाला है।


कुल 850 से ज्यादा फर्जी सिम, अपराध में इस्तेमाल की आशंका

पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि इस गिरोह ने कुल 850 से अधिक सिम कार्ड फर्जी पहचान के आधार पर जारी किए। इन सिम कार्ड्स का इस्तेमाल वित्तीय धोखाधड़ी, फर्जी कॉल और अन्य आपराधिक गतिविधियों में होने की आशंका जताई जा रही है—जिससे मामला और गंभीर हो जाता है।


AI टूल ने खोली पोल, ऐसे पकड़ा गया गिरोह

इस पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित फेशियल रिकग्निशन सिस्टम से हुआ। डेटा विश्लेषण में पाया गया कि एक ही चेहरा कई अलग-अलग नामों और पतों से जुड़ा हुआ है। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी अनिल रवानी और उसके साथी सिराज खान उर्फ शेरू को गिरफ्तार कर लिया—यहीं से केस ने बड़ा मोड़ लिया।


कैसे काम करता था पूरा रैकेट?

आरोपी इन सिम कार्ड्स को ब्लैक मार्केट में बेचते थे।.इन्हें ऐसे लोगों को दिया जाता था जो अपनी असली पहचान छिपाकर अपराध करना चाहते हैं। यानी यह सिर्फ एक तकनीकी धोखाधड़ी नहीं, बल्कि संगठित अपराध का हिस्सा था—जो कई स्तरों पर खतरा पैदा करता है।


जांच का दायरा बढ़ेगा

पुलिस अब उन सभी लोगों की पहचान करने में जुटी है, जिनके पास ये फर्जी सिम पहुंचे हैं। संभावना है कि इस जांच से और बड़े नेटवर्क का खुलासा हो सकता है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या इस तरह के फ्रॉड को रोकने के लिए सिस्टम और मजबूत किया जाएगा, या अपराधी नई तकनीकों का फायदा उठाते रहेंगे?

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