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सिंहस्थ 2028 के लिए MP में 15 हजार से ज्यादा सेवादूत तैयार होंगे, भोपाल में बनेगा अत्याधुनिक ट्रेनिंग सेंटर

24 सित, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
सिंहस्थ 2028 के लिए MP में 15 हजार से ज्यादा सेवादूत तैयार होंगे, भोपाल में बनेगा अत्याधुनिक ट्रेनिंग सेंटर
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। सिंहस्थ 2028 में श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए मध्यप्रदेश में प्रशिक्षित सेवादूत और स्वयंसेवक तैयार करने की योजना सामने आई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में अत्याधुनिक ट्रेनिंग सेंटर बनाने की घोषणा की है।


विशेष संगोष्ठी में मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन सिंहस्थ में 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। भीड़ प्रबंधन को बड़ी चुनौती बताते हुए उन्होंने सेवा व्यवस्था के लिए बड़े स्तर पर प्रशिक्षण की जरूरत बताई।


भोपाल में बनेगा अत्याधुनिक ट्रेनिंग सेंटर

स्काउट एंड गाइड के मास्टर ट्रेनर, सेवादूतों और स्वयंसेवकों को विधिवत प्रशिक्षण देने के लिए भोपाल में अत्याधुनिक ट्रेनिंग सेंटर बनाया जाएगा।


सेंटर तैयार होने और प्रशिक्षण शुरू होने तक जरूरत के अनुसार सांदीपनि विद्यालय के भवनों एवं परिसरों का इस्तेमाल प्रशिक्षण के लिए किया जाएगा।


15 हजार से ज्यादा स्वयंसेवकों की तैयारी

सिंहस्थ-2028 में 15 हजार से अधिक प्रशिक्षित स्वयंसेवक सेवा कार्यों में लगाए जाएंगे। ये स्वयंसेवक 20 से अधिक कैंपों के माध्यम से जिम्मेदारी संभालेंगे।


सिंहस्थ-2016 में करीब 7,500 स्काउट एवं गाइड ने 10 कैंपों के जरिए सेवाएं दी थीं। इस बार संख्या और कैंप दोनों बढ़ाए जाने की तैयारी है।


100 मास्टर ट्रेनर होंगे तैयार

प्रशिक्षण व्यवस्था के तहत आपदा प्रबंधन संस्थान के सहयोग से 100 मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा प्रदेश के प्रत्येक जिले से 500 युवाओं को सेवादूत के तौर पर प्रशिक्षित किया जाएगा। उज्जैन संभाग के सभी जिलों से 1-1 हजार युवाओं को प्रशिक्षण देने की योजना है।


30 से ज्यादा शिविरों की जिम्मेदारी

सिंहस्थ-2028 में स्काउट एंड गाइड को 30 से अधिक शिविरों के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इनमें 20 शिविर स्काउट-गाइड के होंगे। यह जानकारी सिंहस्थ सेवा दल के प्रभारी एवं मध्यप्रदेश स्काउट एंड गाइड के राज्य कोषाध्यक्ष रमेश शर्मा ने दी।


भीड़ प्रबंधन को सबसे बड़ी चुनौती बताया

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिंहस्थ 2028 में भीड़ प्रबंधन को सबसे बड़ी चुनौती बताया। उनके अनुसार इतने बड़े धार्मिक आयोजन में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए पर्याप्त मानव संसाधन और प्रशिक्षण जरूरी है।


उन्होंने सिंहस्थ 2028 को सेवा-भाव, प्रबंधन क्षमता और सुशासन की व्यापक परीक्षा बताया। सरकार का लक्ष्य सुरक्षित और सुव्यवस्थित सिंहस्थ कराना है।


स्काउट-गाइड के पुराने अनुभव पर भरोसा

मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद आयोजित पांच सिंहस्थों में भारत स्काउट एंड गाइड ने सेवा के कई उदाहरण पेश किए हैं। उन्होंने संगठन की कार्यशैली, क्षमता और समर्पण को 15 वर्षों से अधिक समय से उज्जैन सिंहस्थ के आयोजनों में करीब से देखने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि भारत स्काउट एंड गाइड का मूल मंत्र सेवा है और उसका ध्येय वाक्य 'तैयार रहो' है।


चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के लिए भी प्रशिक्षण

सिंहस्थ के दौरान स्वयंसेवकों को भीड़ प्रबंधन के साथ विभिन्न चुनौतियों और अप्रिय परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंहस्थ 2028 आध्यात्मिक चेतना, भारतीय संस्कृति और वैश्विक आस्था का विराट पर्व है। आयोजन की व्यापकता को देखते हुए बड़ी संख्या में लोगों को पूरी क्षमता के साथ सेवा के लिए तैयार रहना होगा।


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