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युवाओं के लिए कौशल, रोजगार व संस्कार आधारित शिक्षा समय की मांग है: मंगुभाई पटेल

04 अग, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
युवाओं के लिए कौशल, रोजगार व संस्कार आधारित शिक्षा समय की मांग है: मंगुभाई पटेल
Hitesh Kumar Singh
डेस्क रिपोर्टर
Hitesh Kumar Singh

भोपाल। ‘गुणवत्तापूर्ण और संस्कार आधारित शिक्षा समाज और राष्ट्र के विकास का आधार है। विकसित भारत के लिए गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा जरूरी है। युवाओं के लिए कौशल, रोजगार और संस्कार आधारित शिक्षा समय की मांग है। शिक्षा जगत के मनीषियों को देश के युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण व संस्कार आधारित शिक्षा पर विशेष चिंतन किया जाना चाहिए।


ये बातें राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने मंगलवार को उच्च शिक्षा विभाग के तत्वावधान में आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में आयोजित कार्यशाला में कहीं। विषय राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 के अंतर्गत ''उभरते ज्ञान क्षेत्र, उन्नत पाठ्यक्रम: दृष्टि, दिशा एवं क्रियान्वयन'’ रहा। राज्यपाल के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यशाला शुभारंभ किया। उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन भी मौजूद रहे। राज्यपाल पटेल ने कहा कि हर बच्चे के लिए रोजगारपरक शिक्षा सुनिश्चित करना शिक्षा जगत की सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए।


राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश के सभी विश्वविद्यालय और शैक्षणिक संस्थानों को अधिक से अधिक रोजगार और कौशल आधारित पाठ्यक्रमों का संचालन करना चाहिए। विद्यार्थियों के लिए प्लेसमेंट की व्यवस्था बनाए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि स्थानीय उद्योगों की मांग के अनुरूप पाठ्यक्रमों को तैयार किया जाए। शैक्षणिक संस्थान, औद्योगिक संस्थानों और प्रतिष्ठानों से समन्वय किया जाए। आवश्यकता अनुसार शोध और अनुसंधान कर नये कोर्स डिजाइन करें।

  

युवा स्वस्थ और सशक्त राष्ट्र के कर्णधार 

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत का संकल्प युवा शक्ति, ज्ञान, नवाचार, कौशल और जन सहभागिता पर आधारित है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उद्देश्य शिक्षा को जीवन, रोजगार, शोध, नवाचार, भारतीय ज्ञान और मानवीय मूल्यों से जोड़कर नई दिशा देना है। उन्होने कहा कि भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। युवा स्वस्थ और सशक्त राष्ट्र के कर्णधार हैं। शिक्षा जगत की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है कि वे देश के युवाओं को शिक्षित, स्वस्थ सशक्त, संस्कारी और नशामुक्त बनाए।


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