
भोपाल। कटनी जिले में बनी 11.952 किलोमीटर लंबी स्लीमनाबाद जल-सुरंग अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज इस परियोजना का निरीक्षण करेंगे, जिसे देश की सबसे लंबी और तकनीकी रूप से सबसे जटिल जल-सुरंग माना जा रहा है।
करीब 17 वर्षों की निर्माण प्रक्रिया के बाद सुरंग में अब केवल एक मीटर का अंतिम ब्रेक-थ्रू शेष है। इसके चालू होने पर नर्मदा का पानी प्राकृतिक गुरुत्वाकर्षण के सहारे विंध्य क्षेत्र तक पहुंचेगा और लाखों किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी।
1450 गांवों को मिलेगा स्थायी सिंचाई लाभ
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अनुसार परियोजना से जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना जिलों के लगभग 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई उपलब्ध होगी।
उन्होंने कहा कि इससे विंध्य और महाकौशल क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और लंबे समय से सिंचाई की प्रतीक्षा कर रहे क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिलेगा।
गुरुत्वाकर्षण से बहेगा नर्मदा का पानी
यह जल-सुरंग विंध्य पर्वतमाला के भीतर से नर्मदा का पानी सोन नदी के कछार तक पहुंचाने के लिए बनाई गई है। इसकी खासियत यह है कि 10.14 मीटर व्यास वाली इस सुरंग में पानी बिना बिजली और भारी पंपों के केवल ग्रेविटी फ्लो से प्रवाहित होगा।
निर्माण कार्य लगभग पूरा
मुख्यमंत्री ने बताया कि परियोजना का 96.66 प्रतिशत भौतिक कार्य पूरा हो चुका है।
11.952 किमी लंबी मुख्य जल-सुरंग का निर्माण पूरा।
12.135 किमी लंबी ओपन कट नहर का निर्माण पूरा।
0.913 किमी कट एंड कवर नहर में 0.725 किमी कार्य पूरा।
केवल 0.188 किमी कार्य शेष है।
2008 में शुरू हुआ था निर्माण
नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की इस टर्न-की परियोजना का निर्माण कार्य हैदराबाद की निर्माण एजेंसी मेसर्स पटेल-एस.ई.डब्ल्यू. (संयुक्त उपक्रम) को सौंपा गया था।
अनुबंध वर्ष: 2008
प्रारंभिक लागत: ₹799 करोड़
अब तक कुल व्यय: ₹1610.47 करोड़
व्यय का विवरण:
मूल कार्य: ₹772.33 करोड़
मूल्य समायोजन: ₹573.71 करोड़
डीवॉटरिंग सिस्टम: ₹123.99 करोड़
वर्टिकल शाफ्ट: ₹19.36 करोड़
केमिकल ग्राउटिंग: ₹121.08 करोड़
मुख्यमंत्री ने बताया कि भू-गर्भीय चुनौतियों, जल रिसाव रोकने के विशेष उपायों और आधुनिक तकनीकों के उपयोग के कारण परियोजना की लागत में वृद्धि हुई।
जिलेवार सिंचाई क्षेत्र
टनल शुरू होने के बाद सीधे कमांड क्षेत्र में आने वाली भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा।
कटनी: 21,823 हेक्टेयर
मैहर: 54,227 हेक्टेयर
सतना: 1,04,970 हेक्टेयर
रीवा: 3,084 हेक्टेयर
पन्ना: 448 हेक्टेयर
इसके अलावा बरगी दायीं तट मुख्य नहर के माध्यम से छह जिलों की कुल 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी।
चरणबद्ध तरीके से बढ़ेगा सिंचाई क्षेत्र
मुख्यमंत्री के मुताबिक परियोजना के तहत दिसंबर 2026 तक 87,433 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। दिसंबर 2027 तक यह दायरा बढ़कर 1,54,693 हेक्टेयर हो जाएगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि स्लीमनाबाद टनल का निरीक्षण विंध्य क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक अवसर है। उनके अनुसार यह परियोजना क्षेत्र में खुशहाली, समृद्धि और कृषि विकास की नई दिशा तय करेगी।
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