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सोनम रघुवंशी जमानत: 320 दिन बाद मिली राहत, कोर्ट ने गिरफ्तारी की 4 बड़ी खामियां गिनाईं

29 अप्रैल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
सोनम रघुवंशी जमानत: 320 दिन बाद मिली राहत, कोर्ट ने गिरफ्तारी की 4 बड़ी खामियां गिनाईं
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में बड़ा मोड़ आया है। मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को करीब 320 दिन बाद जमानत मिल गई है। शिलॉन्ग कोर्ट के इस फैसले ने जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


अदालत का फैसला: शिलॉन्ग में ही रहना होगा

शिलॉन्ग कोर्ट ने सोमवार को जमानत मंजूर करते हुए साफ कहा कि ट्रायल के दौरान सोनम को शिलॉन्ग में ही रहना होगा। मंगलवार को उसके पिता देवी सिंह शिलॉन्ग पहुंचे और जमानत की औपचारिकताएं पूरी कीं। उसी शाम सोनम जेल से रिहा हो गई, लेकिन मीडिया से बिना कोई बयान दिए निकल गई—जो कई सवाल छोड़ गया।


गिरफ्तारी प्रक्रिया पर कोर्ट ने उठाए सवाल

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि गिरफ्तारी के दौरान नियमों का पालन नहीं हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, 7 जून 2025 को गाजीपुर में गिरफ्तारी के समय सोनम को कारण स्पष्ट नहीं बताया गया था। अदालत ने इसे संविधान के अनुच्छेद 22(1) का उल्लंघन माना—यहीं से केस का रुख बदलता दिखा।


पुलिस की 4 बड़ी गलतियां जो भारी पड़ीं

जांच के दौरान अदालत ने चार अहम खामियां गिनाईं, जो जमानत की वजह बनीं:

- अधूरा अरेस्ट फॉर्म: गिरफ्तारी के समय जरूरी कॉलम खाली छोड़े गए

- धाराओं में गड़बड़ी: केस में 103(1) और 403(1) की अलग-अलग एंट्री मिली

- वकील की अनुपस्थिति: पहली पेशी के दौरान कानूनी सहायता का रिकॉर्ड नहीं


बचाव के अधिकार पर असर: सही आरोप न बताने से शुरुआती बचाव प्रभावित हुआ


10 महीने की हिरासत भी बनी वजह

सोनम 9 जून 2025 से जेल में थी और 10 महीने से ज्यादा न्यायिक हिरासत में रह चुकी थी। केस की प्रगति धीमी रही—90 गवाहों में से सिर्फ 4 की ही गवाही हो सकी। आखिरी गवाह 3 फरवरी 2026 को पेश हुआ था।


प्रोफाइल और रिकॉर्ड ने भी दिलाई राहत

बचाव पक्ष ने कोर्ट को बताया कि सोनम इंदौर की रहने वाली है और उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। वकील के अनुसार, वह एक स्थापित कारोबारी परिवार से आती है और फरार होने की संभावना कम है। साथ ही, 25 वर्षीय महिला होने के आधार पर जमानत में नरमी की दलील भी दी गई।


पुलिस का विरोध, लेकिन कोर्ट ने नहीं माना

मेघालय पुलिस ने आशंका जताई थी कि सोनम सबूतों से छेड़छाड़ कर सकती है या गवाहों को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, कोर्ट ने माना कि चार्जशीट और सबूत पहले से न्यायिक निगरानी में हैं, इसलिए छेड़छाड़ की आशंका ठोस आधार पर साबित नहीं होती।

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