
भोपाल। मध्यप्रदेश के हजारों सरकारी कर्मचारियों और नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। राज्य सरकार अब उस नियम में बदलाव करने जा रही है, जो बीते करीब 25 साल से कर्मचारियों पर तलवार बनकर लटका हुआ था। बात हो रही है ‘दो बच्चों के नियम’ की, जिसके तहत तीसरा बच्चा होने पर सरकारी नौकरी पर संकट आ जाता था। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया है और जल्द ही इसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
दिग्विजय सरकार में लागू हुआ था यह सख्त नियम
मध्यप्रदेश में यह नियम 26 जनवरी 2001 को तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की सरकार के दौरान लागू किया गया था। उस समय जनसंख्या दर तेजी से बढ़ रही थी, जिसे काबू में करने के लिए यह फैसला लिया गया।
नियम के मुताबिक अगर किसी अभ्यर्थी के तीन बच्चे हैं तो वह शासकीय नौकरी के लिए अयोग्य माना जाएगा। अगर कोई कर्मचारी सेवा में रहते हुए तीसरे बच्चे का पिता या माता बनता है, तो उसकी सेवा समाप्त तक की कार्रवाई हो सकती है। हैरानी की बात यह रही कि इसके बाद सरकारें बदलती रहीं, लेकिन इस नियम को न तो हटाया गया और न ही इसमें कोई ढील दी गई।
पड़ोसी राज्यों ने बदले नियम, अब एमपी की बारी
मध्यप्रदेश के पड़ोसी राज्य राजस्थान और छत्तीसगढ़ पहले ही इस नियम में संशोधन कर चुके हैं। अब मोहन यादव सरकार भी इसी दिशा में कदम बढ़ाने जा रही है।
सरकार के सामने सबसे बड़ा तर्क यह है कि मध्यप्रदेश की कुल प्रजनन दर (TFR) करीब 2.4 है। जबकि देश की औसत प्रजनन दर 1.9 से थोड़ी ज्यादा है। यानी, आबादी नियंत्रण का उद्देश्य काफी हद तक पूरा हो चुका है, ऐसे में अब सख्त नियमों को नरम करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
परिवीक्षा नियम में भी होगा बड़ा बदलाव
सरकार सिर्फ दो बच्चों के नियम में ही नहीं, बल्कि परिवीक्षा (Probation Period) से जुड़े नियमों में भी बदलाव करने जा रही है। अभी स्थिति यह है कि कर्मचारी की परिवीक्षा अवधि पूरी हो जाने के बाद भी उसे नियमित होने में काफी लंबा समय लग जाता है। इसका सीधा नुकसान कर्मचारियों को वेतनवृद्धि और अन्य सुविधाओं में होता है। कमलनाथ सरकार के समय परिवीक्षा अवधि को 3 साल निर्धारित किया गया था और उसके बाद कर्मचारी को पूरा वेतन मिलने का प्रावधान था। लेकिन व्यवहार में कई मामलों में कर्मचारियों को वर्षों तक नियमितीकरण का इंतजार करना पड़ता है। अब सरकार इस पूरे प्रोसेस के लिए निश्चित समय सीमा तय करने की तैयारी में है, ताकि कर्मचारियों को समय पर नियमित किया जा सके और उनका आर्थिक नुकसान न हो।
हजारों कर्मचारियों को मिलेगा सीधा फायदा
यदि कैबिनेट से यह प्रस्ताव पास हो जाता है, तो तीसरे बच्चे को लेकर नौकरी का डर खत्म होगा। नए कर्मचारियों को समय पर नियमितीकरण और वेतनवृद्धि का लाभ मिलेगा। लंबे समय से परेशान चल रहे हजारों शासकीय कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, सामान्य प्रशासन विभाग का प्रस्ताव पूरी तरह तैयार है और इसे जल्द ही कैबिनेट बैठक में रखा जाएगा।
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