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‘ज्ञान पर्यटन’ का हिस्सा बनीं गीतांजलि शासकीय कन्या महाविद्यालय की छात्राएं, केकड़िया के जनजातीय समुदाय के जीवनशैली देख हुईं आनंदित

13 नव, 20250 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
Students in tribal villege

Students in tribal villege

Hitesh Kumar Singh
डेस्क रिपोर्टर
Hitesh Kumar Singh

भोपाल। गीतांजलि शासकीय कन्या महाविद्यालय की छात्राएं मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड की ओर से संचालित “ज्ञान पर्यटन” का हिस्सा बनीं। 49 छात्राओं के समूह ने पर्यटन गांव केकड़िया का भ्रमण किया। वहां के जनजातीय समुदाय के जीवनशैली जाना। बैलगाड़ी की सवारी, पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों के निर्माण, तिरंदाजी गतिविधियों से जुडकर आनंदित हुईं। 

अपर मुख्य सचिव पर्यटन संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व और प्रबंध संचालक टूरिज्म बोर्ड शिव शेखर शुक्ला के मार्गदर्शन में ज्ञान पर्यटन प्रकल्प शुरू किया गया है। उद्देश्य छात्राओं में सांस्कृतिक जागरूकता, ग्रामीण परंपराओं से जुड़ाव और सतत कृषि पद्धतियों की समझ विकसित करना है। केकड़िया भ्रमण “ज्ञान पर्यटन” का चौथा कार्यक्रम रहा था। भ्रमण के दौरान छात्राओं का स्वागत स्थानीय जनजातीय समुदाय की महिलाओं ने गीत और नृत्य के साथ किया।

 

छात्राओं ने स्थानीय हाट बाजार का भ्रमण किया, जहां उन्होंने जनजातीय जीवनशैली की गहराइयों को नजदीक से समझा। उन्होंने पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों (चोमड़ी), जनजातीय चिकित्सा पद्धतियों, स्थानीय कृषि उत्पादों, जैविक वस्तुओं, अनाज, गृह उपयोगी सामग्री और पारंपरिक हथियारों जैसे धनुष-बाणों का भी अवलोकन किया। यह जाना कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में परंपरागत कौशल और हस्तकला किस प्रकार आज भी जीवंत हैं। छात्राओं के साथ डॉ. अनीता देभरतार और डॉ. मधु त्रिवेदी मार्गदर्शक के रूप में उपस्थित रहीं।

 

संचालन मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड की कौशल शाखा के अंतर्गत संचालक (कौशल) डॉ. डीपी सिंह के मार्गदर्शन में किया गया। यह भ्रमण सेफ टूरिज्म डेस्टिनेशन वुमन परियोजना के अंतर्गत प्रशिक्षित सुश्री वाणी राजपूत के निर्देशन में हुआ। यात्रा के सफल आयोजन में विलेज वॉयस के राजेश साहू, केकड़िया के स्थानीय समन्वयक फतेह सिंह और टूरिज्म बोर्ड की कौशल शाखा टीम का विशेष योगदान रहा। 

 

धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के बारे में जानकारी प्राप्त की

भ्रमण के अंतिम चरण में छात्राओं ने सामासगढ़ जैन मंदिर में दर्शन किए। स्थानीय लोगों से इस क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम का समापन उत्साहपूर्ण माहौल में हुआ, छात्राओं ने लोकगीतों और नृत्य के माध्यम से जनजातीय कलाकारों के साथ सहभागिता की और चाय-नाश्ते के दौरान अपने अनुभव साझा किए।




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