
भोपाल। स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 के नतीजों का इंतजार अब जल्द खत्म हो सकता है। इस बार पुरस्कारों की घोषणा अक्टूबर में प्रस्तावित है, जबकि पिछले साल परिणाम जुलाई में घोषित किए गए थे।
मध्यप्रदेश के करीब 15 शहर रैंकिंग की दौड़ में हैं। शहरों की स्थिति तय करने में कचरा प्रबंधन के साथ नागरिकों की प्रतिक्रिया और टीमों का मैदानी आकलन अहम रहेगा।
12,500 अंकों पर तय होगी स्वच्छता रैंकिंग
इस बार पूरी रैंकिंग 12,500 अंकों के आधार पर तैयार होगी। इनमें ODF, Water Plus और Garbage Free City के लिए 1,000-1,000 अंक निर्धारित हैं। बाकी 10,500 अंक सर्वे टीमों के मैदानी निरीक्षण के आधार पर तय किए जाएंगे। यही हिस्सा शहरों की वास्तविक स्वच्छता व्यवस्था की बड़ी तस्वीर सामने रखेगा।
अंकों का पूरा बंटवारा
दिखाई देने वाली स्वच्छता — 1,500
कचरे का सेग्रीगेशन, संग्रहण और परिवहन — 1,000
सॉलिड वेस्ट प्रोसेसिंग — 1,500
एक्सेस टू सेनिटेशन — 1,000
उपयोग किए गए पानी का प्रबंधन — 1,000
डीस्लजिंग सर्विसेज का मशीनीकरण — 500
स्वच्छता की एडवोकेसी — 1,500
इकोसिस्टम सशक्तिकरण — 1,000
स्वच्छता कर्मियों का कल्याण — 500
सिटीजन फीडबैक और शिकायत निवारण — 1,000
एक साल में 1,730 टन बढ़ा रोजाना घरेलू कचरा
मध्यप्रदेश में घरेलू कचरे का दबाव लगातार बढ़ा है। एक साल के भीतर रोजाना निकलने वाले कचरे की मात्रा में 1,730 टन की वृद्धि दर्ज की गई। कचरे की प्रोसेसिंग भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। एक साल पहले रोजाना 18.05 टन कचरे की प्रोसेसिंग नहीं हो पा रही थी। अब यह अंतर बढ़कर 55.39 टन प्रतिदिन हो गया है।
34 डंपिंग साइट्स पर 13 लाख मीट्रिक टन लीगेसी वेस्ट
प्रदेश की 34 डंपिंग साइट्स पर करीब 13 लाख मीट्रिक टन लीगेसी वेस्ट जमा है। पुराने कचरे का यह ढेर कई शहरों में स्वच्छता व्यवस्था के लिए चुनौती बना हुआ है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर और सतना जैसे बड़े शहरों में भी कचरे के बड़े ढेर होने की जानकारी दी गई है।
धार्मिक स्थलों से स्कूलों तक पहुंची सर्वे टीम
स्वच्छ सर्वेक्षण की टीमों ने फरवरी-मार्च में प्रदेश के नगरीय निकायों में निरीक्षण पूरा किया। इस बार केवल सामान्य सफाई व्यवस्था तक सर्वे सीमित नहीं रहा। टूरिस्ट और हेरिटेज स्थलों के साथ धार्मिक स्थानों तथा उन जगहों की सफाई भी देखी गई जहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।
स्कूलों में जाकर बच्चों के व्यवहार में स्वच्छता से जुड़े बदलाव का भी आकलन किया गया। नई टूलकिट में खुले में शौच और खुले में यूरिनेशन रोकने से जुड़ा इंडिकेटर भी शामिल किया गया था।
'स्वच्छ शहर जोड़ी' से छोटे शहरों को मिल सकता है फायदा
इस वर्ष स्वच्छ शहर जोड़ी नाम से नई अवॉर्ड कैटेगरी शुरू की गई है। इसके तहत बेहतर प्रदर्शन करने वाला शहर अपने नजदीकी शहर को स्वच्छता के तरीके सिखाकर जोड़ी के रूप में पुरस्कार हासिल कर सकता है।
पिछले साल मध्यप्रदेश के 8 शहरों को अवॉर्ड मिला था। इनमें इंदौर, उज्जैन, बुदनी, भोपाल, देवास, शाहगंज, जबलपुर और ग्वालियर शामिल थे।
इन शहरों के आसपास के नगरों के साथ इस नई श्रेणी में जोड़ी बनने की संभावना है।
नागरिकों की राय भी बनेगी रैंकिंग का हिस्सा
स्वच्छता व्यवस्था के साथ सिटीजन फीडबैक और शिकायत निवारण के लिए 1,000 अंक रखे गए हैं। यानी शहरों की रैंकिंग केवल निरीक्षण से तय नहीं होगी, नागरिकों की प्रतिक्रिया भी कुल स्कोर का हिस्सा बनेगी। कचरा संग्रहण से लेकर प्रोसेसिंग और स्वच्छता व्यवस्था तक कई स्तरों पर शहरों का मूल्यांकन किया जाएगा।
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