
शिवपुरी। मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले की पिछोर विधानसभा से भाजपा विधायक प्रीतम लोधी एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। इस बार वजह कोई राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि एक ऐसे कुख्यात डकैत के प्रति सार्वजनिक सम्मान है, जिसका नाम गंभीर आपराधिक घटनाओं से जुड़ा रहा है। लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में प्रीतम लोधी ने डकैत रामबाबू गड़रिया की तस्वीर पर पुष्प अर्पित किए और उसे अपना "सुख-दुख का साथी" बताया। इतना ही नहीं, विधायक ने मंच से कहा कि रामबाबू परिस्थितियों का शिकार था और समाज के कुछ लोगों ने उसे डकैत बनने पर मजबूर कर दिया।
अपराधी की छवि सुधारने की कोशिश?
राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या एक जनप्रतिनिधि को ऐसे व्यक्ति के प्रति सार्वजनिक सम्मान व्यक्त करना चाहिए, जिसका नाम वर्षों तक अपराध की दुनिया से जुड़ा रहा हो? विधायक के बयान ने उन परिवारों की यादें भी ताजा कर दी हैं, जिन्होंने डकैतों के आतंक का दौर देखा था। आलोचकों का कहना है कि अपराध की राह चुनने वालों को "परिस्थितियों का शिकार" बताना कहीं न कहीं उनके कृत्यों को हल्का दिखाने जैसा है।
"क्या डकैत और गुंडे इंसान नहीं होते?" बयान पर नया विवाद
कार्यक्रम में प्रीतम लोधी ने सवाल उठाया कि "क्या डकैत और गुंडे इंसान नहीं होते?" यही टिप्पणी अब सबसे ज्यादा चर्चा में है। विरोधियों का तर्क है कि इंसानियत और अपराध दो अलग-अलग विषय हैं। सवाल यह नहीं है कि अपराधी इंसान है या नहीं, बल्कि यह है कि क्या एक निर्वाचित विधायक को अपराध के इतिहास वाले व्यक्ति का सार्वजनिक महिमामंडन करना चाहिए?
जेल और जंगल में मुलाकात का दावा
विवाद तब और गहरा गया जब विधायक ने मंच से कहा कि उनकी मुलाकात रामबाबू गड़रिया से जेल में भी हुई थी और जंगल में भी। उन्होंने यहां तक कहा कि वह स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें उसकी तस्वीर पर माल्यार्पण करने का अवसर मिला। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है। कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर एक विधायक को किस बात का सौभाग्य महसूस हुआ?
पहले भी विवादों से रहा है नाता
प्रीतम लोधी का नाम इससे पहले भी कई विवादित बयानों में सामने आ चुका है। हाल ही में उन्होंने करैरा के एसडीओपी को लेकर भी तीखी टिप्पणी की थी, जिसने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा पैदा की थी। अब डकैत रामबाबू गड़रिया को लेकर दिया गया बयान उनके राजनीतिक विरोधियों को नया मुद्दा दे गया है।
लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि समाज के लिए आदर्श माने जाते हैं। ऐसे में जब कोई विधायक एक कुख्यात डकैत को अपना दोस्त बताए, उसकी तस्वीर पर माल्यार्पण करे और उसे परिस्थितियों का शिकार बताकर भावनात्मक समर्थन दे, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
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