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MP में मानसून लेट होने से किसानों की बढ़ी टेंशन! कृषि वैज्ञानिक ने जारी की सख्त चेतावनी, भूलकर भी न करें ये काम

17 जून, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
MP में मानसून लेट होने से किसानों की बढ़ी टेंशन! कृषि वैज्ञानिक ने जारी की सख्त चेतावनी, भूलकर भी न करें ये काम
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। ​मौसम केंद्र की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, तेलंगाना के भद्राचलम में मानसून पिछले एक सप्ताह से आगे नहीं बढ़ पाया है। इस रुकावट के कारण मध्य प्रदेश के साथ-साथ छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में भी मानसून की एंट्री लेट हो गई है। अब अनुमान लगाया जा रहा है कि एमपी में मानसून 21 से 23 जून के बीच दस्तक दे सकता है।


​मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आमतौर पर सूबे में 15 जून तक मानसून प्रवेश कर जाता है। पिछले साल यानी 2025 में भी यह 16 जून को आ गया था, लेकिन इस बार एक हफ्ते की देरी ने गणित बिगाड़ दिया है। इस देरी का सीधा असर जून महीने के कोटे पर पड़ा है, जिससे अब तक 35% कम बारिश दर्ज की गई है। इस सूखे जैसे हालात के बीच किसानों के लिए एक बड़ी गाइडलाइन सामने आई है।


​खरीफ फसलों की बोवनी पर संकट, कृषि वैज्ञानिक की बड़ी सलाह

​वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक एसएस धाकड़ ने बताया कि खरीफ की मुख्य फसलें जैसे—सोयाबीन, उड़द, मूंग और तूअर की बोवनी के लिए कम से कम 100 मिमी यानी 4 इंच बारिश होना अनिवार्य है। इतनी बारिश के बाद ही मिट्टी के भीतर बीजों के अंकुरण के लिए जरूरी नमी बन पाती है।

​"जब तक खेतों में पर्याप्त पानी न गिर जाए, तब तक किसान भाई बोवनी की शुरुआत बिल्कुल न करें। इसके साथ ही, बोवनी से पहले बीजों का उपचार (Seed Treatment) जरूर कर लें ताकि फसल सुरक्षित रहे।" 

- एसएस धाकड़, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक


​मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 1 से 16 जून के बीच राज्य में जहां करीब डेढ़ इंच पानी गिरना था, वहां बेहद मामूली वर्षा हुई है। खासकर पूर्वी मध्य प्रदेश के हालात बेहद खस्ता हैं, जहां सामान्य की आधी बारिश भी नसीब नहीं हुई है। हालांकि, इस तपन के बीच कुछ जिलों को राहत भी मिली है।


​सीधी में सबसे ज्यादा बारिश, तापमान में आई भारी गिरावट

​भले ही मानसून की मुख्य धारा अटकी हो, लेकिन प्री-मानसून गतिविधियों के कारण राज्य के कई हिस्सों में मंगलवार को आंधी-तूफान का दौर देखा गया। मौसम विभाग के अनुसार, सीधी जिले में सबसे ज्यादा 1 इंच के करीब पानी बरसा है। इसके अलावा बैतूल, रीवा और सतना में आधा इंच या उससे अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई।

​इस आंधी-पानी के चलते प्रदेश के कई शहरों में दिन के तापमान में बड़ी गिरावट आई है। शिवपुरी में अधिकतम पारा सबसे कम 35 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि पचमढ़ी में 35.4 डिग्री और सिवनी में 36.4 डिग्री रहा। बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 37 डिग्री, इंदौर में 37.3 डिग्री, ग्वालियर में 39.5 डिग्री, उज्जैन में 38.5 डिग्री और जबलपुर में पारा 40.4 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया।


​34 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, इन इलाकों में तपेगी धूप

​मौसम केंद्र ने बुधवार को राज्य के 34 जिलों में आंधी के साथ तेज बारिश का अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में ग्वालियर, भिंड, मुरैना, श्योपुर, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, इंदौर, उज्जैन और खंडवा-खरगोन जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। इन इलाकों में धूलभरी आंधी के साथ बौछारें पड़ने की पूरी संभावना है। दूसरी तरफ, भोपाल, विदिशा, रायसेन, सागर, जबलपुर और शहडोल समेत कई जिलों में मौसम बिल्कुल साफ रहेगा। मौसम विभाग के मुताबिक, इन क्षेत्रों में तेज धूप खिली रहेगी और लोगों को गर्मी तथा उमस का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में मानसून की सटीक एंट्री का इंतजार ही एकमात्र विकल्प बचा है।

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