
ग्वालियर। डबरा में आयोजित विश्व के प्रथम नवग्रह शक्तिपीठ के दिव्य प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के तहत बुधवार को पंडित प्रदीप मिश्रा ने भव्य शिव पुराण कथा का शुभारंभ किया। हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थिति दर्ज कराई। इस अवसर पर प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री व वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि नवग्रह शक्तिपीठ की स्थापना महज धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक पहचान को सशक्त करने का संकल्प है। यह पूरे ग्वालियर-चंबल अंचल के लिए गर्व का विषय है।
महोत्सव का विधिवत शुभारंभ डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने परिवार सहित पूजा-अर्चना के साथ किया। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद, नवग्रह आह्वान और कलश स्थापना के साथ विशेष अनुष्ठान संपन्न हुए। पहले दिन की कथा के मंच पर दाती महाराज, देवकीनंदन ठाकुर और धूमेश्वर धाम वाले महाराज की उपस्थिति में व्यास पीठ पर विराजमान पंडित प्रदीप मिश्रा का पुष्पहार पहनाकर अभिनंदन किया गया। डबरा सहित आसपास के जिलों से हजारों श्रद्धालु कथा सुनने के लिए पहुंचे। महिलाओं की विशेष भागीदारी और पारंपरिक वेशभूषा ने आयोजन की भव्यता को और बढ़ाया।
नवग्रह शक्तिपीठ में आयोजित यह प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक समरसता का भी सशक्त संदेश दे रहा है। आने वाले दिनों में डबरा एक भव्य आध्यात्मिक धाम के रूप में देशभर में अपनी विशेष पहचान स्थापित करता नजर आ रहा है

शिव केवल आराध्य नहीं, बल्कि सृष्टि का आधार हैं
प्रवचन में पंडित प्रदीप मिश्रा ने भगवान शिव की महिमा, भक्ति की शक्ति और जीवन में श्रद्धा के महत्व को सरल एवं प्रभावशाली उदाहरणों के माध्यम से समझाया। उन्होंने कहा कि शिव केवल आराध्य नहीं, बल्कि सृष्टि का आधार हैं। शिव उपासना से जीवन में संतुलन, शांति और कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। नवग्रहों के आध्यात्मिक प्रभाव और कर्म से उनके संबंध पर दिए गए उनके विचारों से श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने डबरा की धरती पर जो कार्य किया है वह अद्भुत, विलक्षण है : देवकीनंदन महाराज
पंडित प्रदीप मिश्रा की शिवपुराण कथा में पहुंचे कथा वाचक देवकी नंदन महाराज ने मीडिया से कहा कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने डबरा में भव्य और दिव्य आयोजन कराया है। सनातन को आगे बढ़ाने के लिए मंदिर, पुराण,प्रचारकों की आवश्यकता होती है, सनातन धर्म को आगे बढ़ाने के लिए डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने डबरा की धरती पर जो कार्य किया है वह अद्भुत, विलक्षण है जिन्हें शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है।
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