
भोपाल। मध्यप्रदेश में अब प्लॉट और मकान के पट्टाधारकों को पक्की रजिस्ट्री के लिए अपनी जेब से पैसा खर्च नहीं करना होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 'मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना' के तहत पात्र भू-स्वामियों को उनके पट्टों की नि:शुल्क रजिस्ट्री कराने के निर्देश दिए हैं। रजिस्ट्री पर लगने वाला स्टाम्प शुल्क राज्य सरकार वहन करेगी।
मुख्यमंत्री ने रविवार को समत्व भवन में योजना की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को इसे अभियान के रूप में चलाकर जल्द से जल्द सभी पात्र हितग्राहियों को लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संपत्ति के साथ उसके पक्के राजस्व दस्तावेज होना जरूरी है। रजिस्ट्री मिलने से भू-स्वामियों को कानूनी मालिकाना हक मजबूत होगा और वे अपनी संपत्ति का क्रय-विक्रय करने के साथ उस पर बैंक से ऋण भी ले सकेंगे।
बैठक में मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) नीरज मंडलोई, सचिव परिवहन एवं आयुक्त जनसम्पर्क मनीष सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव चंद्रशेखर वालिम्बे, आयुक्त भू-अभिलेख निधि निवेदिता सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।
धनतेरस पर गांवों में होगा रजिस्ट्री अभियान
मुख्यमंत्री ने योजना को गति देने के लिए बड़ा निर्देश देते हुए कहा कि आगामी 6 नवंबर को धनतेरस के दिन प्रदेश के सभी मंत्री, सांसद और विधायक अपने पैतृक या पसंद के किसी गांव में पहुंचेंगे। जनप्रतिनिधि अपनी मौजूदगी में गांव के पात्र हितग्राहियों की शत-प्रतिशत रजिस्ट्री पूरी कराएंगे। जिला कलेक्टरों को प्रभारी मंत्रियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय कर अभियान सफल बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। रजिस्ट्री पूरी होने पर गांव में कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा।
15 नवंबर तक 20 लाख रजिस्ट्री का लक्ष्य
बैठक में प्रमुख सचिव राजस्व डॉ. ई. रमेश कुमार ने बताया कि 1 नवंबर 2026 तक प्रदेश में 12 लाख 87 हजार 252 रजिस्ट्रियां पूरी की जा चुकी हैं। सरकार ने 15 नवंबर तक यह आंकड़ा 20 लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पक्की रजिस्ट्री से भू-धारकों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और संपत्ति उनके लिए आर्थिक अवसरों के नए रास्ते खोलेगी। यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और अगले वर्ष इसे 'युवा वर्ष' से भी जोड़ा जाएगा।
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