
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित दो दिवसीय चौथे राष्ट्रीय HR-CSR सम्मेलन ‘अभ्युदय’ का शुभारंभ किया। इसमें उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण के जीवन पर शोध करने वाले विद्वानों और संस्थाओं को राज्य सरकार पूरा सहयोग देगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक समरसता, कर्तव्यनिष्ठा और सुशासन का आदर्श उदाहरण है। जहां गीता समाप्त होती है, वहीं से जीवन का अभ्युदय शुरू होता है। श्रीकृष्ण ने कंस का वध करने के बाद सत्ता संभालने के बजाय योग्य व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंपी। उनकी जीवन यात्रा समाज को सेवा, मित्रता और नैतिक नेतृत्व की प्रेरणा देती है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण से जुड़े स्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित कर रही है। इसके लिए श्रीराम वन गमन पथ और श्रीकृष्ण पाथेय के माध्यम से धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित किया जा रहा है।
श्रीकृष्ण के जीवन से सीखें नेतृत्व और कर्तव्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी मानव धर्म और राजधर्म का पालन किया। उन्होंने युधिष्ठिर को राजगद्दी पर बैठाया और योग्यता के आधार पर जिम्मेदारी देने का संदेश दिया। श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता सामाजिक समरसता का उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीकृष्ण के व्यक्तित्व से लोकतांत्रिक व्यवस्था, उद्यमशीलता, मित्रता, माता-पिता के सम्मान और अनुशासन की सीख मिलती है। नरकासुर वध के माध्यम से उन्होंने सामाजिक न्याय का उदाहरण भी प्रस्तुत किया। उन्होंने ऐसे आयोजनों को देशभर में बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।
युवाओं के कौशल विकास पर जोर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश तेजी से औद्योगिक निवेश आकर्षित कर रहा है। भोपाल में ग्लोबल स्किल पार्क संचालित है और प्रदेश सरकार ने तीन स्किल यूनिवर्सिटी स्थापित करने की घोषणा की है। युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने के उद्देश्य से कौशल विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इस दौरान टाटा समूह के प्रतिनिधि ने भी मध्यप्रदेश में कौशल विकास के क्षेत्र में विस्तार की मंशा जताई। उन्होंने नशामुक्ति, योग, वेलनेस और आयुष शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार के प्रयासों की भी जानकारी दी।
भारतीय ज्ञान परंपरा व आधुनिक विकास का समन्वय
सम्मेलन का विषय ‘अभ्युदय: Integrating ESG & Civilisational Wisdom for Comprehensive Wellbeing’ है। इसमें पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक कल्याण और सुशासन को भारतीय सभ्यतागत ज्ञान के साथ जोड़ने पर चर्चा की जा रही है। सम्मेलन का उद्देश्य कर्मयोग, लोक संग्रह और धर्म जैसे भारतीय विचारों को नेतृत्व, मानव संसाधन प्रबंधन और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ना है।
कार्यक्रम में इनकी रही मौजूदगी
कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव संस्कृति एवं श्रीकृष्ण पाथेय न्यास के न्यासी सचिव शिवशेखर शुक्ला, सम्मेलन संयोजक डॉ. विक्रांत सिंह तोमर, पद्मश्री डॉ. एचआर नागेंद्र, श्रीराम तिवारी और उद्योग जगत, शिक्षण संस्थानों तथा सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। सम्मेलन 25 अक्टूबर तक चलेगा।
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