
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को वाराणसी प्रवास के दौरान श्री काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर का भ्रमण किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में विकास की एक नई इबारत लिखी जा रही है। मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की सरकारों ने "विरासत के साथ विकास" के मंत्र को आत्मसात किया है। मुख्यमंत्री ने विश्वनाथ मंदिर कॉरीडोर में देवी अहिल्या की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि दोनों राज्य सुशासन और धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में साझा संस्कृति विकसित कर रहे हैं। यह समन्वय न केवल दोनों राज्यों के संबंधों को प्रगाढ़ करेगा, बल्कि जन-कल्याण के नए मार्ग भी प्रशस्त करेगा। मुख्यमंत्री ने अपने वाराणसी प्रवास का शुभारंभ श्री काशी विश्वनाथ के दर्शन और पूजन के साथ किया। उन्होंने मंदिर के गर्भगृह में पूर्ण विधि-विधान से पूजन कर मध्यप्रदेश की जनता की खुशहाली और निरंतर प्रगति की मंगलकामना की। मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।
मुख्यमंत्री ने घाट पर पहुंचकर गंगा मैया का दर्शन और पूजन किया। उन्होंने कहा कि बाबा विश्वनाथ के धाम में आकर जो आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है, वह अद्भुत है। मुख्यमंत्री श्री काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर का विस्तृत अध्ययन भ्रमण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि बाबा विश्वनाथ और बाबा महाकाल के धामों के बीच व्यवस्थाओं के सुदृढ़ी बनाने और सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए एक महत्वपूर्ण एमओयू किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य दर्शनार्थियों को सुगम और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
वाराणसी के अनुभवों को सिंहस्थ-2028 के लिए प्रासंगिक बताया
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वाराणसी के अनुभवों को मध्यप्रदेश के उज्जैन में होने वाले आगामी सिंहस्थ-2028 के लिए प्रासंगिक बताया। उन्होंने श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट से बैठक की। बैठक में प्रेजेंटेशन के माध्यम से कॉरिडोर में तीर्थयात्री प्रबंधन, क्राउड कंट्रोल (भीड़ प्रबंधन), दर्शन व्यवस्था और मोबाइल ऐप आधारित टोकन सिस्टम का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि प्रयागराज कुंभ और काशी कॉरिडोर के प्रबंधन से सीख लेकर हम उज्जैन में श्रद्धालुओं के लिए दूरगामी योजनाएं तैयार कर रहे हैं। श्रद्धालुओं को दर्शन की उच्चतम और सुगम व्यवस्था देना हमारा लक्ष्य है।
मुख्यमंत्री की उपस्थिति में इन बिंदुओं पर की गई चर्चा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से तीर्थस्थल प्रबंधन की एसओपी को समझा। इसमें रियल टाइम सीसीटीवी मॉनिटरिंग, जोन-बेस्ड क्राउड कंट्रोल, सुरक्षा प्रोटोकॉल और स्वच्छता प्रबंधन के आधुनिक तौर-तरीकों पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री को इस अवसर पर काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट की ओर से 'ग्लोबल सनातन' पुस्तक भी भेंट की गई।
महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य का मंचन 3 से 5 अप्रैल तक
मुख्यमंत्री ने बताया कि उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन और न्यायप्रियता को जन-जन तक पहुंचाने के लिए आगामी 3 से 5 अप्रैल तक वाराणसी में महानाट्य का मंचन किया जा रहा है। सम्राट विक्रमादित्य शोध संस्थान के माध्यम से आयोजित होने वाले इस महानाट्य में सैकड़ों कलाकार हिस्सा लेंगे, जिसमें हाथी, घोड़े और ऊंटों के साथ प्राचीन विधाओं का जीवंत प्रदर्शन होगा।
केन-बेतवा लिंक परियोजना से दोनों राज्यों के किसानों का भाग्य बदल रहा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश के बीच बढ़ते आर्थिक और बुनियादी ढांचे के सहयोग का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना के माध्यम से दोनों राज्यों के किसानों का भाग्य बदल रहा है। दोनों राज्यों के किसानों को सस्ती और निर्बाध बिजली उपलब्ध होगी। अध्ययन भ्रमण और बैठक के दौरान उत्तरप्रदेश सरकार के औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी', सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री राकेश सचान, मध्यप्रदेश के अपर मुख्य सचिव राघवेंद्र सिंह, सचिव पर्यटन डॉ. इलैयाराजा टी, उज्जैन संभागायुक्त आशीष सिंह, वाराणसी कलेक्टर सत्येंद्र सिंह और काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के सीईओ विश्व भूषण मिश्र सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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