
मध्य प्रदेश को देश में ‘टाइगर स्टेट’ कहा जाता है, लेकिन इसी राज्य में बाघों की लगातार हो रही मौतें अब चिंता का बड़ा कारण बन गई हैं। हालात ऐसे हैं कि साल 2025 में अब तक 54 बाघों की मौत दर्ज की जा चुकी है। इस गंभीर मामले पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए सरकार से जवाब तलब किया है।
हाईकोर्ट ने क्यों जताई चिंता
बाघों की बढ़ती मौतों को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मामले को बेहद गंभीर माना है। इस पर की डिवीजन बेंच ने केंद्र सरकार, मध्य प्रदेश सरकार और को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
54 बाघों की मौत, रिकॉर्ड पर सवाल
भोपाल के वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे की ओर से दायर याचिका में बताया गया है कि जनवरी से 19 दिसंबर 2025 के बीच प्रदेश में कुल 54 बाघों की मौत हुई है। याचिका के मुताबिक, यह आंकड़ा 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत के बाद किसी एक साल में सबसे ज्यादा है।
इतना ही नहीं, करीब 57 प्रतिशत मौतें अप्राकृतिक बताई जा रही हैं, जो वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं।
कहां सबसे ज्यादा मौतें हुईं
याचिका में दावा किया गया है कि सबसे ज्यादा बाघों की मौत शहडोल–बांधवगढ़ लैंडस्केप और रातापानी टाइगर रिजर्व इलाके में हुई है। बांधवगढ़ क्षेत्र में कई बाघों के शव बिजली लाइनों के पास मिले हैं, जिससे करंट लगने से मौत की आशंका जताई गई है। आरोप है कि कुछ मामलों में इन्हें आपसी संघर्ष बताकर जांच को कमजोर किया गया।
सरकार से मांगा गया पूरा जवाब
हाईकोर्ट ने साफ तौर पर पूछा है कि बाघों की मौत आखिर क्यों हो रही है और इन्हें रोकने के लिए सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए हैं। अदालत ने सभी पक्षों को 11 फरवरी तक अपना जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
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