
इंदौर। मध्य प्रदेश में बाइक टैक्सी के नाम पर चल रही दोपहिया सेवाओं पर हाई कोर्ट ने कड़ा रुख दिखाया है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि बिना वैध परमिट के किसी भी बाइक को पब्लिक ट्रांसपोर्ट की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इस फैसले के बाद इंदौर समेत पूरे प्रदेश में चल रही बाइक टैक्सी सेवाओं पर कार्रवाई की आशंका बढ़ गई है।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, इंदौर में ओला, उबर और रैपिडो जैसे एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म से जुड़े सैकड़ों दोपहिया वाहन यात्रियों को ले जाने के काम में लगे हुए हैं। इनका उपयोग आम लोगों को लाने-ले जाने के लिए किया जा रहा है, लेकिन इनके पास वैध परिवहन परमिट नहीं है। इसी मुद्दे को लेकर हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की।
बिना परमिट बाइक से सवारी ढोना कानून के खिलाफ
मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने मोटर व्हीकल एक्ट-1988 के प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक किसी दोपहिया वाहन के पास वैध परमिट और तय नियमों का पालन नहीं होता, तब तक उसे सार्वजनिक परिवहन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इसे सीधे तौर पर मोटर व्हीकल एक्ट और एग्रीगेटर गाइडलाइंस का उल्लंघन बताया।
यात्रियों की सुरक्षा से समझौता नहीं
हाई कोर्ट ने कहा कि एग्रीगेटर कंपनियों को राज्य सरकार की एग्रीगेटर गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करना होगा। केवल मोबाइल एप के जरिए रजिस्ट्रेशन या बुकिंग सुविधा देना पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने राज्य सरकार और परिवहन विभाग को निर्देश दिए हैं कि वे बिना परमिट चल रहे दोपहिया वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें। कोर्ट ने साफ कहा कि यात्रियों की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
आगे क्या हो सकता है असर
हाई कोर्ट के आदेश के बाद इंदौर सहित प्रदेश के अन्य शहरों में चल रही बाइक टैक्सी सेवाओं पर बड़ा असर पड़ सकता है। परिवहन विभाग जांच अभियान चला सकता है, बिना परमिट चल रहे वाहनों पर कार्रवाई संभव है, और एग्रीगेटर कंपनियों को नियमों के अनुसार सेवाएं संचालित करनी होंगी। इस फैसले को सड़क सुरक्षा और कानून व्यवस्था की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
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