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भोजशाला विवाद पर हाई कोर्ट में आज बड़ा फैसला? ASI की सीलबंद रिपोर्ट खुलेगी, कानूनी लड़ाई में नया मोड़

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भोजशाला विवाद पर हाई कोर्ट में आज बड़ा फैसला? ASI की सीलबंद रिपोर्ट खुलेगी, कानूनी लड़ाई में नया मोड़

भोजशाला विवाद पर हाई कोर्ट में आज बड़ा फैसला? ASI की सीलबंद रिपोर्ट खुलेगी, कानूनी लड़ाई में नया मोड़

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर चल रही खींचतान अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गई है। सोमवार को इंदौर हाई कोर्ट में होने वाली सुनवाई को लेकर माहौल गरम है और दोनों पक्षों की धड़कनें तेज हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद फिर से शुरू हुई कानूनी प्रक्रिया में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की लंबी वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट अदालत के सामने रखी जा चुकी है, जिस पर आज तीखी बहस होने वाली है।


सीलबंद रिपोर्ट के राज होंगे उजागर

मामला जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ के सामने सूचीबद्ध है। अब तक जिन तथ्यों को सीलबंद लिफाफे में रखा गया था, वे भी अदालत में खोले जाएंगे। माना जा रहा है कि इन खुलासों के बाद केस की दिशा बदल सकती है और आगे की सुनवाई का रोडमैप तय होगा।


सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद तेज हुई प्रक्रिया

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 22 जनवरी को साफ निर्देश देते हुए हाई कोर्ट की इंदौर बेंच से तीन हफ्तों के भीतर सुनवाई आगे बढ़ाने को कहा था। सर्वे पूरा होने के बाद कुछ समय के लिए प्रक्रिया धीमी पड़ गई थी, लेकिन अब रोक हटने के साथ ही मामला फिर से रफ्तार पकड़ चुका है और सभी की निगाहें अदालत के अगले कदम पर टिकी हैं।


ASI ने हाईटेक तकनीक से की जांच, जमीन के नीचे तक टटोले सबूत

भोजशाला परिसर की सच्चाई तक पहुंचने के लिए ASI ने आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया। जमीन के भीतर छिपे ढांचों का पता लगाने के लिए ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (GPR) का इस्तेमाल किया गया, जबकि पत्थरों और अवशेषों की उम्र जानने के लिए कार्बन डेटिंग की गई। पूरे क्षेत्र की सटीक माप के लिए GPS मैपिंग तैयार हुई और हर साक्ष्य को सुरक्षित रखने के लिए रंगीन फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की गई।


फैसले से पहले बढ़ी हलचल, विवाद फिर सुर्खियों में

सर्वे की रिपोर्ट सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। अब अदालत में होने वाली बहस यह तय करेगी कि आगे की कानूनी लड़ाई किस दिशा में जाएगी। भोजशाला का मुद्दा पहले ही संवेदनशील रहा है और आज की सुनवाई इसे फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला सकती है।

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