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प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टर्स से राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा- भौतिक सुविधाओं का सुख होता है क्षणिक

21 नव, 20250 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
Governer Mangubhai Patel and trainee deputy collector's

Governer Mangubhai Patel and trainee deputy collector's

Hitesh Kumar Singh
डेस्क रिपोर्टर
Hitesh Kumar Singh

भोपाल। आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन अकादमी के प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टर्स ने शुक्रवार को राजभवन में राज्यपाल मंगुभाई पटेल से मुलाकात की। राज्यपाल कहा कि हर समय, हर समाज में अच्छे व्यक्तियों का सदैव सम्मान होता है। संवेदनशीलता पूर्वक किए सेवा कार्यों से आत्मिक आनंद मिलता है। भौतिक सुविधाओं का सुख क्षणिक होता है।

राज्यपाल ने कहा कि पूरी एकाग्रता और समर्पण के साथ सीखना ही भावी जीवन की सफलताओं का आधार है। प्रशिक्षण के दौरान छोटी सी चूक भविष्य की बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सिविल सेवक सरकार और जनता के बीच की महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। सुशासन का आधार होते हैं। सुशासन की प्राथमिक आवश्यकता है कि अधिकारी संवेदनशीलता, विवेक, न्यायोचित व्यवहार और तथ्यों के आधार पर निर्णय करें। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी और अपर सचिव उमाशंकर भार्गव भी मौजूद थे।

 

राज्यपाल को आरसीवीपी प्रशासन एवं प्रबंध अकादमी के संचालक मुजीबुर्रहमान खान ने प्रशिक्षण के स्वरूप और व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 14 जुलाई से 19 दिसम्बर तक के लिए आयोजित परिचयात्मक प्रशिक्षण कार्यक्रम में 24 डिप्टी कलेक्टर शामिल है। प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टर कविता यादव और निशांत भूरिया ने प्रशिक्षण के अनुभवों को साझा किया। आभार प्रदर्शन सह-प्रशिक्षण संचालक रुचि जैन ने किया। राज्यपाल को अकादमी संचालक ने स्मृति चिन्ह भेंट किया।    

 

प्रशासनिक सफलता कमरों में रहकर कार्य से नहीं मिलती 

राज्यपाल ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा योजनाओं का निर्माण वंचित, गरीब और पिछड़े व्यक्तियों, समुदायों की मदद और उत्थान के उद्देश्यों से होता है। योजना की मंशा के भाव, भावनाओं और हितग्राही की परिस्थितियों को समझे बिना उनके स्वरूप के निर्धारण और क्रियान्वयन से समस्याएं उत्पन्न होती है। उन्होंने नल-जल और आवास योजनाओं के प्रसंग के माध्यम से प्रशिक्षु अधिकारियों को क्रियान्वयन की जमीनी हकीक़तों से परिचित कराया। राज्यपाल ने कहा कि प्रशासनिक सफलता कमरों में रहकर कार्य से नहीं मिलती। क्षेत्र का सघन भ्रमण जरूरी है। 





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